Sambhal Violence: उत्तर प्रदेश के संभल में शाही जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी के सदर एडवोकेट जफर अली की कल हुई गिरफ्तारी के में वकीलों ने आज पुलिस के खिलाफ प्रदर्शन किया. इसके साथ ही चंदौसी के कचहरी सभागार में जिला बार एसोसिएशन की बैठक हुई, जिसमें हड़ताल पर जाने से पूर्व जिला जज के यहां जफर अली की जमानत के लिए अर्जी दाखिल करने का निर्णय लिया गया.
इसके साथ ही पुलिस पर षड्यंत्र के तहत अधिवक्ता को फंसाकर जेल भेजने का आरोप लगाते हुए सड़कों पर प्रदर्शन किया गया. जफर अली की गिरफ्तारी के विरोध में संभल में अधिवक्ताओं ने सोमवार को हड़ताल की घोषणा कर दी और सिविल न्यायालय परिसर में एकत्रित होकर पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अधिवक्ता तहसील पहुंचे. न्यायिक कार्य से विरत रहने के दौरान उनके चैंबर बंद नजर आए.
क्या है आरोपदरअसल, 24 नवंबर 2024 को जामा मस्जिद में सर्वे के दौरान हिंसा भड़क उठी थी. इस दौरान लोगों ने पथराव फायरिंग और आगजनी की घटना को अंजाम दिया था, जिसमें चार लोगों की मौत भी हुई थी. इस मामले में जामा मस्जिद के सदर और अधिवक्ता जफर अली को हिंसा भड़काने के आरोप में रविवार को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेजा दिया था. इसके बाद अब अधिवक्ताओं का विरोध देखने को मिल रहा है.
गंभीर धाराओं में गिरफ्तार कर जेल भेजे गए जामा मस्जिद की इंतजामिया कमेटी के सदर एडवोकेट जफर अली पर दंगा भड़काने में मुख्य भूमिका निभाने का आरोप लगाया गया है. इनके खिलाफ एक दर्जन से अधिक धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी. इनमें सबसे प्रमुख भारतीय न्याय संहिता की धारा 230 व 231 हैं, इसमें कम से कम दस साल और अधिक से अधिक आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है.
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इन धाराओं में मामला दर्जजफर अली के खिलाफ जिन धाराओं में मुकदमा पंजीकृत किया उनमें 191-2, 191-3, 190, 221, 132, 125, 324-5, 195, 233, 326-एफ, 230 व 231 वीएनएस के अलावा संपत्ति अधिनियम की धारा 3-4 आदि हैं. अधिवक्ताओं के अनुसार बीएनएस की धारा 230 और 231 में दस साल से लेकर आजीवन कारावास तक का प्रावधान है. जफर अली की जमानत पर सिविल जज सीनियर डीवीजन और अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आदित्य सिंह की अदालत में सुनवाई की गई.
इन धाराओं के तहत सेशन ट्रायल होना था. ऐसे में फौरी तौर पर अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के यहां से इनकी जमानत अर्जी खारिज की गई. इन्हें दो दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजा गया है. जफर अली के के अधिवक्ताओं की ओर से कहा गया कि जफर अली ह्रदय रोगी हैं, ऐसे में उन्हें अस्पताल में रखा जाए. इसके लिए उनका मेडिकल सर्टिफिकेट भी बनवाया गया है. वहीं अधिवक्ताओं के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए संभल की सुरक्षा कड़ी कर दी गयी है और पुलिस अधिकारी फ़ोर्स के साथ सड़कों पर गश्त कर रहे हैं ताकि कानून व्यवस्था बनी रहे.