समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद जावेद अली ने विवादित बयान देते हुए भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) पर देश में जहर फैलाने का आरोप लगाया. इसके साथ ही सपा सांसद ने देश के बहुसंख्यक को जहरीला बताया है. अब सपा सांसद के बयान पर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है, इस बयान को पर बीजेपी, कांग्रेस और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) की प्रतिक्रिया सामने आई है.

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समाजवादी पार्टी सांसद जावेद अली के जहर वाले बयान पर प्रदीप भंडारी ने कहा कि प्रदेश की जनता समाजवादी पार्टी को नकारेगी. अगर वह हिंदुओं को जहरीला बोलेंगे तो संविधान में हक मिला हुआ है कि बीजेपी उनकी बात का विरोध करे. यह वह लोग हैं जो हिंदू-मुसलमान की राजनीति करते हैं, मुसलमान को वोट पाने के लिए इस तरीके के बयान देते हैं.

बीजेपी प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा कि हासिमपुरा और मरियाना के जब दंगे हुए थे तब तो भारतीय जनता पार्टी की सरकार नहीं थी. मुजफ्फरनगर के जब दंगे हुए तब तो अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, भरोसा किसने तोड़ा? यह मजहबी तुष्टीकरण के लिए, ध्रुवीकरण के लिए समाजवादी पार्टी के नेताओं के बयान आने वाले चुनाव को देखते हुए अभी लगातार और बढ़ते जाएंगे. मुसलमानों को डराएंगे, बहुसंख्यकों को हमेशा दुश्मन की तरह पेश करने की चेष्टा करेंगे. मजहबी तुष्टीरण करना, जातीय खांचों में बांटना समाजवादी पार्टी की यही रणनीति है और इसी आजमाए हुए नुस्खे पर वो फिर पूरे चुनाव को ले जाने की कोशिश करेंगे. 

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ऐसा बयान नहीं देना चाहिए- इमरान मसूद 

वहीं कांग्रेस से लोकसभा सांसद इमरान मसूद ने कहा कि वह जावेद अली के बयान की निंदा करते हैं और ये निंदनीय है. बहुसंख्यक समाज प्यार वाला, मीठे लोग हैं. ऐसा बयान नहीं देना चाहिए. 

सपा के पास मुसलमानों के अलावा कोई वोट बैंक ही नहीं- AIMIM

इसके साथ ही एआईएमआईएम नेता शादाब चौहान ने भी इसको लेकर समाजवादी पार्टी पर ही हमला बोला है. उन्होंने आरोप लगाया है कि समाजवादी पार्टी बौखलाकर ऐसे बयान दे रही है. एआईएमआईएम नेता शादाब चौहान ने कहा कि समाजवादी पार्टी इस समय बौखला के मूल विषयों पर बात ना करके वो इस प्रकार की बातें कर रही है और उनके पास मुसलमानों के अलावा कोई वोट बैंक ही नहीं है. इसीलिए उनको अभी याद आया है कि दूसरे समाज में भी उनको जाना है, बताइए बुंदेलखंड में समाजवादी पार्टी के कितने विधायक हैं? और यह बात स्पष्ट है कि उत्तर प्रदेश का मुसलमान एक नए राजनीतिक विकल्प के रूप में असदुद्दीन ओवैसी और मजलिस इत्तेहादुल मुस्लिमीन को स्वीकार कर चुका है. 

मुसलमानों की मॉब लिंचिंग पर बात नहीं करते- AIMIM

शादाब चौहान ने कहा कि ये ना मस्जिद मदरसा खानका के टारगेट होने पर बोलते हैं और ना मुसलमानों की मॉब लिंचिंग पर बात करते हैं. ना वक्फ कानून पर बोलते हैं ना वंदे मातरम पर बोलते हैं. बताएं जावेद साहब कि जब वक्फ का कानून आया तो अखिलेश यादव ने सदन में खड़े होकर के क्या बोला था? ये देश जानना चाहता है और समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव जो सियासी डकैती डालते आए हैं मुस्लिम वोट बैंक पर अब उनकी इस नौटंकी से यह सियासी डकैती चलने वाली नहीं है. 

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