मायावती के वोटबैंक में सेंध लगाने में जुटे अखिलेश यादव, कांशीराम महापरिनिर्वाण दिवस पर की खास तैयारी
UP Politics: उत्तर प्रदेश में कांशीराम महापरिनिर्वाण दिवस को लेकर समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच रेस शुरू हो गई हैं. बसपा ने कल लखनऊ में एक बड़ी रैली बुलाई है.

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले दलित वोटरों में पैठ बनाने की होड़ शुरू हो गई हैं. 9 अक्टूबर को कांशीराम महापरिनिर्वाण दिवस के बहाने बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच रेस शुरू हो गई हैं. बसपा इस अवसर पर लखनऊ में एक बड़ी जनसभा करेगी, तो वहीं दलित वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए समाजवादी पार्टी ने राजधानी समेत प्रदेश के सभी जिलों में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया है.
बहुजन समाज पार्टी ने अपने वोट बैंक में हुए बिखराव को रोकने के लिए गुरुवार को लखनऊ में बड़ी जनसभा की तैयारी की है. बसपा सुप्रीमो मायावती ख़ुद इस कार्यक्रम में शामिल होंगी और पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगी. इस दौरान बसपा मुखिया आकाश आनंद को आगे बढ़ाएंगी ताकि उनके बीच युवा नेतृत्व का संदेश जा सके हैं.
दलित वोटबैंक को लेकर सपा-बसपा में रेस
बसपा की इस रैली में पांच लाख लोगों के आने का अनुमान हैं, जिसके बाद लिए पार्टी की ओर से कई दिनों से तैयारियां की जा रही हैं. राजनीति जानकारों का मानना है कि मायावती इस रैली के ज़रिए अपने वोट बैंक को फिर से समेटने की कोशिश करेंगी.
वहीं दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी की नजर भी दलितों पर टिकी है. सपा के पीडीए में डी से दलित वर्ग आता है. अखिलेश यादव लगातार बाबा साहब अंबेडकर और संविधान के नाम पर दलितों को पार्टी के साथ जोड़ने के लिए पसीना बहा रहे हैं. इसका असर 2024 लोकसभा चुनाव में भी देखने को मिला था, जब सपा को सबसे ज्यादा 37 लोकसभा सीटों पर जीत हासिल हुई.
सभी जिलों में श्रद्धाजंलि देगी सपा
सपा अब इसी पीडीए के सहारे 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी भी कर रही है. इसी रणनीति के तहत सपा ने अंबेडकर जयंती पर पूरे प्रदेश में सात दिन का आयोजन किया था और अब कांशीराम के महापरिनिर्वाण दिवस पर सभाएं आयोजित करेगी. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव लखनऊ में पार्टी दफ़्तर में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगे.
लखनऊ के अलावा अन्य जिलों में भी सपा के सभी वरिष्ठ नेताओं को अपने-अपने क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रमों में शामिल होने के निर्देश दिए गए हैं. सपा इन श्रद्धांजलि सभाओं के सहारे बहुजन समाज पार्टी के समानांतर आकर खड़े होने की कोशिश कर रही है. ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि सपा अपनी कोशिशों को कितना कामयाब बना पाती है.
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Source: IOCL





















