कानपुर में झूठे मुकदमे दर्ज करवाकर वसूली करने वाले अधिवक्ता अखिलेश दुबे को लेकर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर जोरदार हमला किया है. उन्होंने उसे भाजपाई वकील करार दिया और कहा कि इस पूरे खेल में पुलिस और भ्रष्ट अधिकारियों की साठगांठ शामिल थी.
सपा अध्यक्ष ने अपने एक्स अकाउंट पर पोस्ट कर लिखा- 'उप्र में भाजपाई भ्रष्टाचार का त्रिकोण- फ़र्ज़ी एनकाउंटर वाली भ्रष्ट भाजपा सरकार, काली कमाई वाले भाजपा संरक्षित भ्रष्ट अधिकारी, उपर्युक्त दोनों की करतूतों को छिपाने वाला भ्रष्ट भाजपाई वकील.. हजारों करोड़ कमानेवाले भ्रष्टाचारी को न ड्रोन देख पाया, न दूरबीन में वो नज़र आया, मामला भी तब खुला जब आपस में ही रंगदारी का गोरखधंधा सामने आया.
अखिलेश यादव ने साधा निशाना
उन्होंने आगे लिखा- 'अब देखते हैं कि इस भाजपाई भू-माफ़िया के अवैध क़ब्ज़ों पर बुलडोज़र अपने आप चलता है या हमारी इस पोस्ट के प्रकाशित होने के बाद या फिर कोई सबसे बड़ा रंगदार, इन सबसे वसूलकर मामला रफ़ा-दफ़ा कर देगा. उप्र के ‘माफ़िया मुक्त’ होने का दावा करनेवाले अब कहाँ हैं? सच तो ये है कि उप्र ‘माफ़िया मुक्त’ नहीं हुआ है, बल्कि उप्र का माफिया किसी एक में समाकर ‘महामाफ़िया’ बन गया है.
जानें क्या है पूरा मामला?
दरअसल कानपुर के चर्चित अधिवक्ता अखिलेश दुबे लोगों को झूठे मुकदमे में फंसाकर उनसे वसूली करने के आरोप में जेल में बंद है. एसआईटी की रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है कि उसने सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से 1500 करोड़ रुपये से ज्यादा की ज़मीन पर कब्जा कर लिया.
एसआईटी जांच में अब तक 54 फर्जी मुकदमें सामने आए हैं जो अखिलेश दुबे के साथ जुड़े हुए हैं. दावा है कि उसे सिंडीकेट में कई आईपीएस और पीपीएस अफ़सर भी शामिल थे. जिनकी काली कमाई को उसकी कंपनियों और जमीनों पर लगाया गया था.
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब बीजेपी नेता रवि सतीजा ने इस मामले में शिकायत दर्ज कराई और उस पर पचास लाख रुपये की रंगदारी मांगने और फर्जी केस दर्ज कराने के बाद उन्होंने थाने में शिकायत की. आरोपी अखिलेश दुबे की गिरफ्तारी के बाद अब और भी कई मामले सामने आने लगे हैं. 17 अगस्त के बाद से उसके खिलाफ 5 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं.
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