उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी उठा-पटक जारी है. समाजवादी पार्टी चीफ अखिलेश यादव पीडीए को हथियार बनाकर राज्य की सत्ता पर काबिज होना चाहते हैं. इसको लेकर अखिलेश यादव ने एक बार फिर पीडीए को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है. अखिलेश यादव ने पीडीए के 'ए' को अब आदिवासियों से जोड़कर नया चुनावी समीकरण साध दिया है. 2024 के लोकसभा चुनाव में पीडीए के दम पर जीत हासिल करने वाले अखिलेश यादव आगामी विधानसभा चुनावों में भी पीडीए को ही हथियार बनाकर बीजेपी को शिकस्त देना चाहते हैं.

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सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने जनजातीय समाज के प्रमाण बनवाने से लेकर महारानी दुर्गावती प्रतिमा की स्थापना से जुड़े वादों द्वारा इसकी शुरुआत की है. सपा अपने सामाजिक आधार को बढाने और बीजेपी के जनजातीय अभियान को खुली चुनौती दे दी है. हलांकि इस पर ओम प्रकाश राजभर की पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी की तरफ से कहा गया कि आदिवासियों पर सियासी घमासान तेज होने वाला है.

इन इलाकों में है अनुसूचित जनजातियों की आबादी

उत्तर प्रदेश के कई जिलों में अनुसूचित जनजाति के लोग रहते हैं. जहां अनुसूचित जनजातियों की आबादी कुल जनसंख्या की लगभग आधा प्रतिशत है. वहीं बलिया, महोबा, चित्रकूट, ललितपुर, सोनभद्र, चंदौली, लखीमपुर, मिर्जापुर और श्रावस्ती में इसका प्रभाव अहम माना जाता है. इन जिलों में गोंड, थारू, बैगा, चेरो, कोल, सहरिया, खरवार जैसी जनजातियां शामिल हैं. हालांकि बीजेपी इनमें ज्यादा एक्टिव है.

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ऐसे में जनजातीय गौरव दिवस को इसी रणनीति के साथ शुरू किया गया. जिसके लगातार कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं. वहीं बीजेपी अपना आधार मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री जनमन योगना से जनजातीय समूहों तक पानी, शिक्षा, आवास, स्वास्थ्य सुविधाएं, सड़क और बिजली पहुंचाई जा रही है.

सपा ने भी की इस मौके को साधने की कोशिश

ऐसे में अब समाजवादी पार्टी ने भी रणनीति बनाना शुरू कर दी है. सपा अब इस मोर्चे को निशाना बनाकर बीजेपी को घेरने में लग गई है. बीती 24 जून को अखिलेश यादव ने आदिवासी समाज के नेताओं को महारानी दुर्गावती के बलिदान दिवस कार्यक्रम में बुलाया और इस रणनीति को तेज करने की दिशा कदम बढ़ाया.

इस दौरान सपा चीफ ने बदहाली और समस्याओं के लिए बीजेपी पर ठीकरा फोड़ा है. साथ ही कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि हमारी सरकार बनने पर अनुसूचित जनजाति आयोग बनाया जाएगा. वहीं लोहिया आवास और दो फीसदी आरक्षण देने का भी वादा किया.

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BJP के खिलाफ वैकल्पिक विमर्श खड़ा करने की कोशिश

बता दें कि सप अब जनजातियों के आधार और उनकी सुविधाओं के मुद्दों पर बीजेपी के खिलाफ वैक्लपिक विमर्श खड़ा करने की कोशिश कर रही है. समाजवादी पार्टी शुरू से ही सामाजिक न्याच, वंचितों और संविधान का मुद्दा उठाती हुई आई है. ऐसे में अब सपा द्वारा पीडीए में आदिवासी को जोड़कर अपनी रणनीति के अलग चरण को दिखाया है. 

अखिलेश यादव के पीडीए से कहीं न कहीं भारतीय जनता पार्टी समेत उसके सहयोगी दल सुभासपा में बैचैनी बढ़ रही है. दरअसल पीडीए के नाम बदलने को लेकर सुभासपा चीफ ओम प्रकाश राजभर ने अब सवाल खड़े कर दिए हैं. जिससे साबित होता है कि सत्ता पक्ष भी अखिलेश के अगले कदम से सतर्क है.

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