उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य और उनके पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी के बीच चल रहे विवाद में अब पुलिस जांच तेज होने की उम्मीद है. देहरादून पुलिस ने मंत्री की शिकायत पर दर्ज मुकदमे की जांच के लिए विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन कर दिया है. एसपी देहात जया बलूनी को टीम की कमान सौंपी गई है. एसआईटी में पुलिस के अलग-अलग थानों और एसओजी के अधिकारियों को शामिल किया गया है.

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इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल उस कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग को लेकर है, जिसके आधार पर रेखा आर्य ने अपने पति पर हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया है. दूसरी ओर गिरधारी लाल साहू ने इस ऑडियो को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की मदद से तैयार किए जाने का दावा किया है. ऐसे में एसआईटी की जांच में डिजिटल साक्ष्यों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होने वाली है.

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जया बलूनी के नेतृत्व में गठित हुई विशेष जांच टीम

देहरादून पुलिस ने मामले की जांच के लिए एसपी देहात जया बलूनी के नेतृत्व में विशेष जांच टीम गठित की है. टीम में क्षेत्राधिकारी सहसपुर अनुज कुमार को विवेचक बनाया गया है. इसके अलावा कोतवाली नगर के प्रभारी निरीक्षक कैलाश चंद्र भट्ट, एसओजी नगर के प्रभारी उपनिरीक्षक संदीप कुमार, डालनवाला कोतवाली की महिला उपनिरीक्षक विनयता चौहान, कैंट थाने के उपनिरीक्षक कमलेश गौड़, कोतवाली नगर के उपनिरीक्षक संदीप कुमार, एसओजी नगर के हेड कांस्टेबल किरन कुमार और कैंट थाने के संजीत कुमार को शामिल किया गया है. पुलिस की ओर से टीम को मामले से जुड़े तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई है.

ऑडियो असली या एआई से तैयार? जांच का अहम सवाल

रेखा आर्य ने अपनी तहरीर में आरोप लगाया है कि उन्हें एक ऑडियो रिकॉर्डिंग मिली है, जिसमें उनके पति एक महिला से बातचीत करते हुए उनकी हत्या की साजिश रच रहे हैं. मंत्री ने इसी आधार पर अपनी और अपने नाबालिग बच्चों की जान को खतरा बताया है. वहीं गिरधारी लाल साहू ने वीडियो जारी कर आरोपों को निराधार बताया और दावा किया कि कथित ऑडियो एआई से तैयार किया गया है.

अब एसआईटी के सामने यह पता लगाने की चुनौती होगी कि ऑडियो की मूल रिकॉर्डिंग कहां से आई, उसमें सुनाई देने वाली आवाज किसकी है और क्या रिकॉर्डिंग में तकनीकी छेड़छाड़ की गई है. फॉरेंसिक परीक्षण से इस विवाद से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं.

फर्जी हस्ताक्षरों से कंपनियों से हटाने का भी आरोप

रेखा आर्य ने अपने पति पर कंपनियों से जुड़े दस्तावेजों में जालसाजी करने का भी आरोप लगाया है. मंत्री के मुताबिक उनके फर्जी हस्ताक्षर कर उन्हें संबंधित कंपनियों के निदेशक पद से हटाया हुआ दर्शाया गया, जबकि उन्होंने न तो इस्तीफा दिया और न ही किसी ऐसे दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए.

इस आरोप की जांच के लिए कंपनियों के रिकॉर्ड, संबंधित दस्तावेजों और हस्ताक्षरों की सत्यता महत्वपूर्ण होगी. यदि जांच में दस्तावेजों से छेड़छाड़ की पुष्टि होती है तो यह मामला केवल पारिवारिक विवाद तक सीमित नहीं रहेगा.

शादी के 22 साल बाद पुलिस तक पहुंचा विवाद

रेखा आर्य की शिकायत के अनुसार उनका विवाह 6 जुलाई 2004 को गिरधारी लाल साहू से हुआ था. उन्होंने आरोप लगाया कि पति ने विवाह के समय अपनी पहली शादी की बात छिपाई थी. कई वर्ष बाद उन्हें पता चला कि उनके पति पहले से विवाहित थे और उस विवाह से बच्चे भी थे.

मंत्री का कहना है कि बच्चों के भविष्य और परिवार के समझाने पर उन्होंने उस समय विवाद को आगे नहीं बढ़ाया. लेकिन बाद में पति के व्यवहार में बदलाव आया और अन्य महिलाओं से संबंधों का विरोध करने पर मारपीट, गाली-गलौज और धमकियां मिलने लगीं.

एससी-एसटी एक्ट के तहत भी दर्ज है मुकदमा

रेखा आर्य ने पति पर सरकारी आवास में कर्मचारियों के सामने जातिसूचक शब्दों से अपमानित करने का आरोप लगाया है. उनकी शिकायत पर कैंट थाने में दर्ज एफआईआर में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण कानून की धाराएं भी शामिल हैं.

15 अक्टूबर को दर्ज एफआईआर में आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी, धमकी और वैवाहिक क्रूरता सहित कई गंभीर आरोप दर्ज किए गए हैं. हालांकि मुकदमा दर्ज होना आरोपों के सिद्ध होने के समान नहीं है। इनकी सत्यता पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया से तय होगी.

पति ने भी लगाए आरोप, अब दोनों पक्षों के दावों की परीक्षा

गिरधारी लाल साहू ने वीडियो के माध्यम से अपनी पत्नी के आरोपों का खंडन किया है. उन्होंने रेखा आर्य पर भ्रष्टाचार से संबंधित आरोप भी लगाए हैं और शिकायत वापस लेने की मांग की है. इस तरह एक ओर कैबिनेट मंत्री ने अपने पति से जान का खतरा बताया है, तो दूसरी ओर पति ने उनके आरोपों को गलत करार दिया है. दोनों पक्षों के परस्पर विरोधी दावों के बीच अब एसआईटी की जांच महत्वपूर्ण हो गई है.

अस्पताल में भर्ती मंत्री के बयान भी होंगे दर्ज

सामने आई जानकारी के मुताबिक कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य अस्पताल में भर्ती हैं. उनके स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद एसआईटी उनके बयान दर्ज करेगी.मंत्री के बयान के साथ ही कथित ऑडियो, कंपनियों के दस्तावेजों और शिकायत में उल्लिखित घटनाओं से जुड़े लोगों की गवाही जांच की दिशा निर्धारित कर सकती है.

2027 चुनाव से पहले बीजेपी के लिए भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम

उत्तराखंड में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं. रेखा आर्य प्रदेश सरकार में महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास मंत्री हैं और अल्मोड़ा की सोमेश्वर विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक हैं. ऐसे समय में उनका अपने पति के खिलाफ हत्या की साजिश, मारपीट और जातिसूचक अपमान जैसे गंभीर आरोप लगाना राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है.

विपक्ष इस मामले को महिला सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के सवालों से जोड़ सकता है. वहीं शिकायत पर एफआईआर दर्ज होने और विशेष जांच टीम गठित किए जाने को सरकार कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई के रूप में प्रस्तुत कर सकती है.

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार के लिए इस मामले में पुलिस की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच महत्वपूर्ण होगी. हालांकि अभी तक इस विवाद के पीछे किसी राजनीतिक साजिश या चुनावी रणनीति का कोई पुष्ट प्रमाण सामने नहीं आया है.

अब एसआईटी की जांच पर टिकी निगाहें

रेखा आर्य और गिरधारी लाल साहू के बीच विवाद में आरोपों और प्रत्यारोपों के बाद अब जांच का केंद्र डिजिटल साक्ष्य, दस्तावेज और गवाह होंगे. सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जिस ऑडियो को मंत्री अपनी हत्या की साजिश का आधार बता रही हैं, वह वास्तविक है या उसमें तकनीकी छेड़छाड़ हुई है? क्या कंपनियों से जुड़े दस्तावेजों में फर्जी हस्ताक्षर किए गए? और क्या जातिसूचक अपमान तथा मारपीट के आरोपों के समर्थन में साक्ष्य मिलते हैं?

इन सवालों के जवाब एसआईटी की जांच से सामने आ सकते हैं. फिलहाल दोनों पक्षों के आरोप जांच के अधीन हैं और किसी भी आरोप को प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता.

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