Corbett Tiger Reserve: कॉर्बेट के बाघ और गुलदार की गर्मियों में मौज, मांसाहारी जीवों को दी जा रही ‘मीट आइसक्रीम ट्रीट’
Corbett Tiger Reserve: कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के ढेला रेस्क्यू सेंटर में रह रहे बाघ और गुलदार भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए खास “मीट आइसक्रीम” का आनंद ले रहे हैं.

कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के ढेला रेस्क्यू सेंटर में इन दिनों एक अनोखी तस्वीर देखने को मिल रही है. यहां रह रहे बाघ और गुलदार भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए खास “मीट आइसक्रीम” का आनंद ले रहे हैं. कॉर्बेट प्रशासन ने इन वन्यजीवों को गर्मी से बचाने के लिए शेडों में पंखे और कूलर लगाने के साथ-साथ ठंडे आहार की व्यवस्था भी की है.
ढेला रेस्क्यू सेंटर में इस समय 15 बाघ और 15 गुलदार रखे गए हैं. इनमें कई वन्यजीव गंभीर रूप से घायल, बीमार अथवा इंसानों के साथ संघर्ष की घटनाओं में शामिल रहे हैं. इन सभी की देखभाल कॉर्बेट प्रशासन की निगरानी में की जा रही है. घायल और बीमार वन्यजीवों के उपचार के लिए वरिष्ठ वाइल्डलाइफ वेटनरी डॉक्टर डॉ . दुष्यंत शर्मा के नेतृत्व में एक अनुभवी टीम लगातार कार्य कर रही है.
SIR पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद का बड़ा बयान, 'देश में इस समय जो...'
मांसाहारी जीवों के लिए हर साल 1 करोड़ रुपये हो रहे खर्च
कॉर्बेट प्रशासन इन 30 मांसाहारी जीवों की देखरेख पर प्रतिवर्ष करीब एक करोड़ रुपये खर्च कर रहा है. गर्मी के मौसम में इन जानवरों को राहत देने के लिए शुरू किया गया “आइसक्रीम प्रयोग” खासा सफल साबित हो रहा है. दरअसल, इन बाघों और गुलदारों को दिए जाने वाले चिकन और दवाओं को विशेष तरीके से बर्फ में जमा कर आइसक्रीम जैसा रूप दिया जाता है. इससे जानवरों को ठंडक भी मिलती है और जरूरी पोषण व दवाएं भी आसानी से मिल जाती हैं.
रेस्क्यू सेंटर के जीवों के लिए तनाव मुक्त जीवन देने का प्रयास
कॉर्बेट के निदेशक डॉ. साकेत बडोला के अनुसार, यह प्रयोग वन्यजीवों को काफी पसंद आ रहा है. उनका कहना है कि रेस्क्यू सेंटर में रह रहे इन जीवों को बेहतर और तनावमुक्त जीवन देने के लिए लगातार नए प्रयास किए जा रहे हैं. कई घायल बाघ और गुलदार उपचार के बाद स्वस्थ होकर दोबारा जंगल में छोड़े भी जा चुके हैं.
रेस्क्यू सेंटर के विस्तार पर विचार कर रहा प्रबंधन
हालांकि, कुछ ऐसे वन्यजीव भी हैं जो गंभीर रूप से घायल होने या मानव-वन्यजीव संघर्ष में शामिल रहने के कारण अब जीवनभर इसी रेस्क्यू सेंटर में रहेंगे. फिलहाल ढेला रेस्क्यू सेंटर अपनी क्षमता के अनुसार पूरी तरह भर चुका है. ऐसे में कॉर्बेट प्रशासन इसके विस्तार की योजना पर काम कर रहा है, ताकि भविष्य में और अधिक जरूरतमंद वन्यजीवों को सुरक्षित आश्रय मिल सके.
























