अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले की जांच के बीच एक बड़ा प्रशासनिक कदम सामने आया है. पिछले 17 वर्षों से अयोध्या में तैनात वायरलेस विभाग के रेडियो मेंटेनेंस ऑफिसर (RMO) अर्जुन देव का तबादला कर उन्हें गोरखपुर भेज दिया गया है. खास बात यह है कि अर्जुन देव मंदिर के वायरलेस सिस्टम, सीसीटीवी निगरानी और दान गिनती कक्ष की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण दायित्व संभाल रहे थे. ऐसे में यह तबादला कई सवाल भी खड़े कर रहा है.

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वर्ष 2009 से अयोध्या में तैनात अर्जुन देव का कई बार स्थानांतरण हुआ, लेकिन हर बार उनका तबादला रुक जाता था. वह राम मंदिर परिसर के वायरलेस सिस्टम, सीसीटीवी कंट्रोल रूम और उस काउंटिंग रूम की निगरानी के प्रभारी थे, जहां श्रद्धालुओं के चढ़ावे की गिनती होती थी.

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केवल सुरक्षा और वायरलेस व्यवस्था तक सीमित नहीं था अर्जुन देव का दखल

राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले की एसआईटी जांच रिपोर्ट में अर्जुन देव की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, वह अपनी आधिकारिक जिम्मेदारियों से आगे बढ़कर ट्रस्ट के कई कार्यों में सक्रिय रहते थे. जांच में यह भी उल्लेख है कि उनका दखल केवल सुरक्षा और वायरलेस व्यवस्था तक सीमित नहीं था, बल्कि VVIP दर्शन व्यवस्था और मंदिर प्रबंधन से जुड़े कई मामलों तक फैला हुआ था.

एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव के साथ-साथ अर्जुन देव की भूमिका और मंदिर व्यवस्था में उनके बढ़े हुए हस्तक्षेप का भी उल्लेख किया है. सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों से निकटता के चलते पूर्व में उनका स्थानांतरण आदेश भी निरस्त हो चुका था. हालांकि अब उन्हें अयोध्या से कार्यमुक्त कर गोरखपुर के लिए रवाना कर दिया गया है. 

राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले की जांच के बीच हुए इस तबादले को प्रशासनिक और जांच प्रक्रिया, दोनों दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है.

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