उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म पर रिलीज होने जा रही वेबसीरिज ‘घूसखोर पंडत’ के विरोध में स्थानीय साधू-संतों ने नाराजगी जाहिर की है. शुक्रवार को बड़ी संख्या में संगम तट पर संतों ने प्रदर्शन कर न सिर्फ वेबसीरिज पर रोक बल्कि निर्देशक नीरज पांडेय और अभिनेता मनोज वाजपेयी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. संतों का आरोप है कि जानबूझकर सनातन समाज को निशाना बनाया जा रहा है.
संतों ने साफ कहा कि फिल्म का नाम और कथानक समाज विशेष को बदनाम करने वाला है. उनका कहना है कि इस तरह की फिल्मों से समाज में गलत संदेश जाता है और धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं. इससे पहले सीएम योगी निर्देश पर इस मामले में मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू हो चुकी है.
ब्राह्मण समाज को बदनाम करने का आरोप
संत संघ श्री सच्चा बाबा आश्रम, अरैल नैनी के संरक्षक और महंत स्वामी डॉ. चंद्रदेव जी महाराज ने गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि बॉलीवुड का एक वर्ग जानबूझकर सनातन परंपरा और विशेष रूप से ब्राह्मण समाज को निशाना बनाता रहा है. फिल्मों के जरिए ब्राह्मणों को अपमानित करने की साजिश की जा रही है, जिसे संत समाज कभी बर्दाश्त नहीं करेगा. यही नहीं साधु-संतों ने फिल्म के निर्माता-निर्देशक नीरज पांडेय और अभिनेता मनोज बाजपेई के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है. साथ ही नेटफ्लिक्स पर भी सवाल उठाते हुए उन्होंने फिल्म को तुरंत बैन करने की अपील की. संत समाज का कहना है कि ओटीटी प्लेटफॉर्म की आड़ में लगातार आपत्तिजनक कंटेंट परोसा जा रहा है.
सीएम योगी की कार्रवाई का स्वागत
साधु-संतों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा लखनऊ के हजरतगंज थाने में एफआईआर दर्ज कराए जाने के कदम का समर्थन किया. उनका कहना है कि यह ब्राह्मण समाज के सम्मान की रक्षा के लिए जरूरी कदम है और इससे एक सकारात्मक संदेश गया है. इस मामले में बसपा सुप्रीमो मायावती के बयान का भी संत समाज ने स्वागत किया है. साधु-संतों का कहना है कि मायावती ब्राह्मण समाज की भूमिका और ताकत को समझती हैं, इसलिए उन्होंने समर्थन दिया. साधु-संतों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस तरह की फिल्मों पर रोक नहीं लगी, तो आंदोलन और तेज होगा. उन्होंने ऐसे फिल्म निर्माताओं और कलाकारों को जेल भेजे जाने की मांग भी दोहराई है.
