मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे और बीजेपी नेता अपर्णा यादव के पति प्रतीक यादव का निधन हो गया है. बीते साल उन्होंने लखनऊ के गौतमपल्ली थाने में धोखाधड़ी, रंगदारी और आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया था. ऐसे में इस केस को लेकर कई तरह के क़यास लग रहे हैं. लेकिन पुलिस का कहना है कि प्रतीक के निधन के बाद भी ये केस बंद नहीं होगा. पुलिस की विवेचना चलती रहेगी. 

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पुलिस की माने तो इस केस में प्रतीक यादव का बयान पहले ही दर्ज कर लिया गया था. प्रतीक ने अपनी लिखित रूप से बयान दिया था जो पुलिस की पास सबूत के तौर पर मौजूद हैं इसके अलावा उनकी ओर से कई दस्तावेज भी पेश किए गए थे, जिनकी जांच भी का जा रही है. ऐसे में पुलिस इस केस की विवेचना को आगे बढ़ाएगी. 

सहायक पुलिस आयुक्त विकास जायसवाल ने इस केस को लेकर बताया कि आईटी एक्ट से जुड़े मामलों की जांच इंस्पेक्टर स्तर के अधिकारी करते हैं लेकिन, वर्तमान समय में गौतमपल्ली के प्रभारी निरीक्षक के एसओ पद पर होने की वजह से इस विवेचना को हज़रतगंज ट्रांसफर कर दिया गया है. 

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प्रतीक यादव ने दर्ज कराई थी एफआईआर

बता दें कि प्रतीक यादव रियल स्टेट और प्रीमियम जिम का कारोबार करते थे, बीते साल 13 जुलाई 2025 को उन्होंने लखनऊ के गौतमपल्ली थाने में रियल स्टेट कंपनी मोनल इंफ्रा के निदेशक कृष्णानंद पांडेय, उनकी पत्नी वंदना पांडेय और पिता अशोक पांडेय के खिलाफ धोखाधड़ी और रंगदारी की शिकायत दर्ज कराई थी. 

उन्होंने अपनी शिकायत में कहा था कि आरोपियों ने शहीद पथ के पास जमीन में निवेश के नाम पर करोड़ों रुपये लिए और जब उन्होंने हिसाब मांगा तो 4 करोड़ की रंगदारी मांगी. पैसे देने से इनकार करने पर उन्हें पॉक्सो एक्ट में फंसाने और सोशल मीडिया पर बदनाम करने तक की धमकी दी थी. कृष्णानंद पांडेय से उनकी मुलाक़ात 2011-12 में हुई थी, बाद में उन्होंने मुनाफे का झांसा देकर पैसे लिए उनकी बड़ी रकम हड़प कर ली. 

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