UP News: प्रतापगढ़ (Pratapgarh) में विभागीय अधिकारी आग की बढ़ती घटनाओं और आग पर काबू न हो पाने की बात की तो चौकाने वाली बातें सामने आई. अग्निशमन अधिकारी प्रभाकर पांडेय ने इस बाबत बताया कि सभी तहसीलों में फायर सेंटर (Fire Center) होना चाहिए. लेकिन अभी तक पट्टी तहसील (Patti Tahseel) में एक भी सेंटर नहीं है जो कि पूर्व मंत्री मोती सिंह का क्षेत्र है.
यहां जमीन मिल गई है और लोक निर्माण विभाग से प्रागड़न तैयार करने को कहा गया है. प्रत्येक तहसील में दो फायर टेंडर यानी बड़ी गाड़ी होनी चाहिए. लेकिन लालगंज को छोड़कर अन्य तहसील में महज एक गाड़ी इतना ही नहीं रानीगंज तहसील व सांगीपुर थाने में तो महज जीप है. जिसपर 400 लीटर की टंकी के साथ एक मोटर रक्खी गई है. मुख्यालय पर भी तीन फायर टेंडर के बजाय दो से काम चलाया जा रहा है. इतना ही नहीं यहां पर एक भी फोम टेंडर नहीं है.
खतरे में क्या हुआयहां फोम टेंडर के द्वारा ही गैस, पेट्रोल और डीजल में आग लगने पर काबू पाया जा सकता है. वीवीआईपी मूवमेंट हेलीकॉप्टर के जरिए होता है तो ऐसी स्थित में फोम टेंडर की नितांत आवश्यकता होती है. बीती सात तारीख को जब गैस से भरे कैसूल टैंकर में रिसाव हुआ तो खतरे की स्थिति से निपटने को प्रयागराज से फोम टेंडर मंगाना पड़ा.
कितनी है गाड़ियां शहर में बने 13 स्थानों पर वाटर हाईडेंट पूरी तरह से निष्प्रयोज्य हो चुके हैं. जिसके चलते कही भी आग की बड़ी घटना होती है तो फायर टेंडर को बार-बार पुलिस लाइन से पानी ले जाना पड़ता है. नतीजा होता है कि सब कुछ राख में तब्दील हो जाता है तो वहीं ग्रामीण इलाकों में ट्यूबवेल से पानी मिल जाता है. जिले में कुल 17 के सापेक्ष महज, छह फायर टेंडर यानी बड़ी गाड़ियां ही हैं. सबसे महत्वपूर्ण है कि 17 के सापेक्ष महज 6 ड्राइवर हैं, जो छोटी बड़ी गाड़ियों को चलाते है.
कितने हैं फाइटरअगर फायर फाइटर्स, हेड, उप अग्निशमन अधिकारी और अग्निशमन अधिकारी का भी टोटा है. 133 फायर फाइटर के स्थान पर महज 69 है. हालांकि नए रिक्रूट जो सीखने आये है कि मिलने से ये संख्या पूरी हो जाती है. हेड 17 होने चाहिए लेकिन एक है सहायक अग्निशमन अधिकारी नौ के बजाय महज एक है. आठ फायर अफसरों के सापेक्ष महज एक है.
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