उत्तर प्रदेश स्थित पीलीभीत में एसआईआर मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है. 22 अक्टूबर 2026 को दो एसडीएम और एक कंप्यूटर ऑपरेटर समेत 3 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. इनमें अमरिया के एआरओ और एसडीएम मयंक गोस्वामी तथा एसडीएम हेमंत चौधरी के नाम शामिल हैं. डीएम आलोक कुमार ने एसआईआर में गड़बड़ी की शिकायतों को लेकर जांच टीम गठित कर कार्रवाई शुरू कर दी है. एसआईआर में गड़बड़ी के मामले में हुई इस कार्रवाई से हड़कंप मच गया है. लखनऊ में कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद पीलीभीत का यह मामला चर्चा में आया था.

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उधर, इस मामले पर समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर पीलीभीत में विधानसभा स्तर पर एसआईआर से जुड़ी लापरवाही के लिए कर्मचारियों पर कार्रवाई हो सकती है, तो पूरे उत्तर प्रदेश में एसआईआर की गंभीर अनियमितताओं की नैतिक जिम्मेदारी मुख्य निर्वाचन आयुक्त क्यों नहीं लेते? 

मैनपुरी सांसद ने कहा कि नैतिकता का तकाजा है कि जिम्मेदार लोग इस्तीफा दें और दोषी पाए जाने पर उन्हें जेल भेजा जाए.

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क्या है मामला?

राजधानी लखनऊ में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष आराधना मिश्रा ने एसआईआर में कथित अनियमितताओं को लेकर पीलीभीत के मामले पर बड़ा दावा किया था. उन्होंने कहा था कि पीलीभीत में 10 अप्रैल को एसआईआर की अंतिम सूची जारी होने के बाद 13 हजार से ज्यादा नामों में बदलाव किए जाने का मामला सामने आया है. 

इससे पहले 21 अक्टूबर को यूपी कांग्रेस के प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने दावा किया था कि पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में 13,150 मतदाताओं के नाम बदल दिए गए, जबकि उनके ईपीआईसी नंबर और सीरियल नंबर पहले जैसे ही रहे. उन्होंने दस्तावेज भी दिखाए. इससे पहले समाजवादी पार्टी भी लगातार मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठा रही है.

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आराधना मिश्रा ने दावा किया था कि संबंधित मतदाताओं के ईपीआईसी नंबर समान थे, लेकिन उन नंबरों पर ऑनलाइन दिखने वाले नाम और पिता के नाम बदल दिए गए थे. 

उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने अपने संगठन के लोगों और टीम के माध्यम से कई मामलों का सत्यापन किया और बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में सभी तथ्यों के साथ इस मामले को प्रस्तुत किया.