पीलीभीत में पुलिस की कार्रवाई का विरोध, महिलाओं ने SP ऑफिस को घेरा, 15 लोगों पर FIR
Pilibhit News In Hindi: पीलीभीत में शराब दुकान का विरोध कर रही महिलाओं ने पुलिस पर बर्बरता का आरोप लगाया है, महिलाओं ने पुलिसिया कार्रवाई के विरोध में एसपी कार्यालय का घेराव किया.

पीलीभीत में शराब की दुकान को लेकर छिड़ा संग्राम अब पुलिस बनाम जनता हो गया है, पुलिस और ग्रामीणों के बीच हुई हिंसक झड़प मामले में पुलिस ने 43 नामजद और 15 अज्ञात लोगों पर FIR दर्ज की है. अब पुलिसिया कार्रवाई के विरोध में भारी संख्या में पीड़ित महिलाओं ने कांग्रेस जिलाध्यक्ष के साथ एसपी कार्यालय का घेराव किया. ग्रामीणों ने सीधे तौर पर तहसीलदार, SDM और पुलिसकर्मियों पर बर्बरता का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है.
दरअसल, यह पूरा विवाद 8 मई को तब शुरू हुआ जब गांव में जबरन शराब की दुकान खोलने की कोशिश की गई. ग्रामीणों का आरोप है कि जब उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से इसका विरोध किया, डीएम से गांव के बाहर शराब की दुकान खोले जाने की अपील की. जिस पर पुलिस ने उन पर लाठियां बरसा दीं.
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43 नामजद और 13 अज्ञात पर केस दर्ज
इसके बाद आक्रोशित ग्रामीण भी पुलिस से भिड़ गए और जमकर हाथापाई हुई. घटना के बाद आबकारी टीम की शिकायत पर पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए 43 नामजद और 15 अज्ञात लोगों पर केस दर्ज कर दिया है और अब आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है.
पुलिस-प्रशासन के खिलाफ कार्रवाई की मांग
इस मामले में एक तरफ पुलिस की दबिश जारी है, तो दूसरी तरफ पीड़ित महिलाओं ने मोर्चा खोल दिया है. कांग्रेस जिलाध्यक्ष हरप्रीत सिंह चब्बा के नेतृत्व में पीड़ित महिलाएं एसपी ऑफिस पहुंचीं और पुलिसिया कार्रवाई को एकतरफा बताया है. महिलाओं का आरोप है कि पुलिस और तहसील प्रशासन ने मिलकर उन पर जुल्म किया है, इसलिए अब वो प्रशासन के खिलाफ ही कानूनी कार्रवाई की मांग कर रही हैं.
पुरुष पुलिसकर्मियों ने महिलाओं और युवतियों को पीटा
पीड़ित महिला सुधा देवी ने कहा, "हमने 20 अप्रैल को ही डीएम साहब को ज्ञापन दिया था कि शराब की दुकान गांव से बाहर खोली जाए, लेकिन तहसील प्रशासन ने जबरदस्ती की. विरोध करने पर पुलिस ने हम पर लाठियां चलाईं." महिला का आरोप है कि पुरुष पुलिसकर्मियों ने महिलाओं और युवतियों को दौड़ा-दौड़ा कर पीटा है. महिला ने कहा कि हमें न्याय चाहिए जो प्रशासन नहीं दे रहा.
ग्रामीण महिला ने बताया कि "डीएम साहब को बोलने के बाद भी दुकान गांव में ही खोल दी गई. विरोध करने पर तहसीलदार ने खुद हम पर डंडा चलाया. पुरुष पुलिसवालों ने हमें जमकर पीटा. हम 20 दिन से धरने पर बैठे थे, लेकिन सुनवाई की जगह हमें जेल भेजने की धमकी दी जा रही है."
कांग्रेस नेता ने की कोर्ट जाने की बात
कांग्रेस जिलाध्यक्ष हरप्रीत सिंह चब्बा ने बताया कि तहसीलदार ने पट्टे की जमीन पर अवैध रूप से दुकान खुलवाई है. ग्रामीणों की बात सुनने के बजाय उन पर लाठियां भांजी गईं. महिलाओं का मेडिकल कराया गया है. अगर इन दोषी अफसरों के खिलाफ पुलिस मुकदमा दर्ज नहीं करती, तो हम न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे और इन महिलाओं को न्याय दिलाकर ही दम लेंगे."
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