एक तरफ बेटियां और पत्नी घरेलू हिंसा का दर्द बयां कर रही हैं, तो दूसरी तरफ 70 साल का एक बुजुर्ग पिता अपने ही घर से बेघर होने को मजबूर है. जिंदगी भर सरकारी नौकरी कर परिवार पालने वाले इस बुजुर्ग को अब बुढ़ापे में अपनों से ही जान का खतरा सता रहा है. यह पूरा मामला घरेलू हिंसा और संपत्ति विवाद के बीच उलझकर रह गया है.

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यह मामला ओएनजीसी (ONGC) से 2017 में सीनियर इंजीनियर के पद से रिटायर हुए एम.ए. कुद्दूसी (70 वर्ष) का है. पूरी उम्र सरकारी सेवा में गुजारने के बाद अब उनका बुढ़ापा पुलिस और प्रशासन के चक्कर काटते हुए बीत रहा है. परिवार में पिता, पत्नी और बेटियों के बीच विवाद इतना गहरा गया है कि मामले में पुलिस और कोर्ट तक को दखल देना पड़ा है.

'घर में रोज होती है प्रताड़ना'

बुजुर्ग की बेटी का आरोप है कि घर का माहौल हमेशा से तनावपूर्ण रहा है. उनके मुताबिक, पिता की ओर से घरेलू हिंसा कोई नई बात नहीं है. पूरा परिवार लंबे वक्त से प्रताड़ना झेल रहा है. बेटी ने यह भी आरोप लगाया है कि बीते 31 मार्च को पुलिस की मदद से उनकी मां को जबरन घर से उठाया गया था.

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'संपत्ति के लिए फंसाया जा रहा, जान का खतरा'

बेटियों के इन आरोपों पर जब एम.ए. कुद्दूसी ने अपना पक्ष रखा, तो तस्वीर बिल्कुल उलट नजर आई. 70 वर्षीय बुजुर्ग का कहना है कि उनकी दोनों बेटियां गलत संगत में पड़ गई हैं और उनकी नजर जीवन भर की मेहनत से कमाई गई संपत्ति पर है. कुद्दूसी का दावा है कि संपत्ति हड़पने के लिए ही उन पर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं. उन्होंने बताया कि बेटियों की हरकतों से परेशान होकर वे उन्हें घर से बेदखल करने के लिए दो बार अखबार में इश्तेहार (Public Notice) भी दे चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद बेटियों ने घर पर कब्जा नहीं छोड़ा है.

हालात ये हो गए हैं कि खुद बुजुर्ग पिता 31 मार्च से अपने ही घर से बाहर रहने को मजबूर हैं. उन्होंने जिला प्रशासन से सुरक्षा की गुहार लगाते हुए कहा है कि उन्हें अपनी ही पत्नी और बेटियों से जान का खतरा है.

कोर्ट का फैसला आ चुका है पिता के हक में

इस पारिवारिक कलह का मामला पहले भी अदालत की चौखट तक पहुंच चुका है. कुछ समय पहले कुद्दूसी पर घरेलू हिंसा का मुकदमा दायर किया गया था, जिसमें कोर्ट ने एम.ए. कुद्दूसी के पक्ष में फैसला सुनाया था. हालांकि, बेटी इस फैसले पर भी सवाल उठाती हैं. उनका कहना है कि मां पर भारी दबाव बनाया गया था, जिसके चलते फैसला पिता के हक में गया.

पुलिस जांच पर टिकी निगाहें

एक ही घर से आ रही दो बिल्कुल अलग कहानियों ने इस मामले को बेहद पेचीदा बना दिया है. क्या यह वाकई घरेलू हिंसा का मामला है, या फिर बुढ़ापे में संपत्ति के लिए रची गई कोई साजिश? अब इस पूरे मामले की सच्चाई पुलिस और जिला प्रशासन की निष्पक्ष जांच रिपोर्ट के बाद ही सामने आ सकेगी.