उत्तराखंड में लागू समान नागरिक संहिता (यूसीसी) ने अपने पहले ही साल में सुशासन और डिजिटल प्रशासन का मजबूत उदाहरण पेश किया है. 27 जनवरी 2026 को यूसीसी को एक साल पूरा होने जा रहा है और इस दौरान विभिन्न सेवाओं के लिए पांच लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हो चुके हैं. सबसे अहम बात यह है कि इतने बड़े स्तर पर आवेदन होने के बावजूद अब तक निजता उल्लंघन का एक भी मामला सामने नहीं आया है.
ऑनलाइन प्रक्रिया से किए जा रहें है यूसीसी के आवेदन
यूसीसी के तहत दी जा रही सेवाओं में विवाह पंजीकरण, विवाह विच्छेद, वसीयत पंजीकरण, लिव-इन संबंधों का पंजीकरण और लिव-इन संबंध समाप्त करने जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं. इन सभी सेवाओं के लिए आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन और फेसलेस प्रक्रिया के माध्यम से किए जा रहे हैं. नागरिक घर बैठे ही पोर्टल के जरिए आवेदन कर सकते हैं, जिससे उन्हें किसी सरकारी कार्यालय या अधिकारी के समक्ष उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं पड़ती.
सरकार की ओर से यूसीसी पोर्टल में नागरिकों की निजी जानकारी की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है. पोर्टल में मजबूत तकनीकी सुरक्षा प्रावधान किए गए हैं, ताकि व्यक्तिगत सूचनाएं पूरी तरह गोपनीय बनी रहें. खास बात यह है कि एक बार आवेदन सक्षम अधिकारी स्तर से स्वीकृत हो जाने के बाद संबंधित अधिकारी भी आवेदक की निजी जानकारी को दोबारा नहीं देख सकता है. आवेदन के साथ दी गई जानकारी तक केवल आवेदक की ही पहुंच रहती है, वह भी निर्धारित सत्यापन प्रक्रिया के तहत.
आम नागरिकों का सरकारी सेवाओं पर भरोसा बढ़ा
वहीं बीते एक साल में यूसीसी के तहत प्राप्त सभी आवेदन सौ प्रतिशत पोर्टल के माध्यम से किए गए हैं. औसतन पांच दिनों के भीतर प्रमाणपत्र उपलब्ध हो जाने से लोगों का समय और संसाधन दोनों की बचत हो रही है. इससे आम नागरिकों का सरकारी सेवाओं पर भरोसा भी बढ़ा है. शुरुआत में समान नागरिक संहिता को लेकर कुछ वर्गों ने आशंकाएं और नकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश की थी, लेकिन एक साल के सफल क्रियान्वयन ने उन सभी सवालों का जवाब दे दिया है.
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यूसीसी ने न केवल नागरिकों की निजता का शत-प्रति शत पालन किया है, बल्कि सरल, पारदर्शी और डिजिटल प्रक्रिया के जरिए प्रदेश में गुड गवर्नेंस का नया मानक भी स्थापित किया है. सरकार का मानना है कि यूसीसी का यह सफल मॉडल आने वाले समय में अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है.