उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में गेहूं खरीद को लेकर किसानों का गुस्सा अब खुलकर सामने आ गया है. राबर्ट्सगंज के सब्जी मंडी परिसर स्थित क्रय केंद्र पर किसान-नौजवान संगठन के बैनर तले दर्जनों किसानों ने प्रदर्शन किया. आरोप है कि केंद्र पर मूलभूत सुविधाओं का अभाव है और खरीद प्रक्रिया में भारी अनियमितताएं हो रही हैं. खास बात ये रही कि किसानों ने अनोखे तरीके से विरोध जताते हुए एक-दूसरे को छाते बांटे और प्रशासन के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की.
संगठन के नेता संदीप मिश्रा ने साफ चेतावनी दी है कि अगर एक हफ्ते के भीतर समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो कलेक्ट्रेट में बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा. वहीं, केंद्र प्रभारी ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए भीड़ को वजह बताया है.
पीने का पानी और बुनियादी सुविधाओं का अभाव
तस्वीरें राबर्ट्सगंज के सब्जी मंडी परिसर की हैं, जहां गेहूं खरीद केंद्र पर किसानों का गुस्सा उबाल पर दिखाई दिया. किसान-नौजवान संगठन के नेतृत्व में पहुंचे किसानों ने अव्यवस्थाओं के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. भीषण गर्मी के बीच छाया और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं तक न होने का आरोप लगाते हुए किसानों ने अनोखे अंदाज में विरोध दर्ज कराया और छाते बांटकर व्यवस्था पर सवाल खड़े किए.
खरीद केन्द्रों पर लापरवाही का आरोप
किसानों का कहना है कि क्रय केंद्र पर गेहूं खरीद में भारी लापरवाही बरती जा रही है, ट्रैक्टरों पर लदा गेहूं घंटों खड़ा रहता है लेकिन खरीद की प्रक्रिया सुचारु नहीं है. बोरे की कमी भी किसानों के लिए बड़ी परेशानी बन रही है, जिससे उन्हें अपनी फसल बेचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है.
आंदोलन की चेतावनी
संगठन के नेता संदीप मिश्रा ने आरोप लगाया कि जिले के अधिकांश क्रय केंद्रों पर सरकार के निर्देशों का पालन नहीं हो रहा है और किसानों को मिलने वाली आधारभूत सुविधाएं पूरी तरह नदारद हैं. उन्होंने साफ कहा कि अगर सप्ताह भर के भीतर हालात नहीं सुधरे तो आंदोलन को और तेज करते हुए कलेक्ट्रेट पर बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा.
केंद्र प्रभारी का आरोपों से इंकार
हालांकि, क्रय केंद्र प्रभारी ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. उनका कहना है कि एक साथ बड़ी संख्या में किसानों के पहुंचने से खरीद प्रक्रिया प्रभावित हो रही है, जिसे व्यवस्थित करने का प्रयास किया जा रहा है. फिलहाल, किसानों का गुस्सा और प्रशासन की सफाई, दोनों आमने-सामने हैं, ऐसे में अब देखना होगा कि किसानों की समस्याओं का समाधान कब तक होता है.
