उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव पर एक बार फिर तीखा हमला बोला है. राजभर ने सोशल मीडिया पर लंबी पोस्ट लिखकर आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) की राजनीति का दावा करती है, लेकिन राजभर समाज के लोगों के साथ हुई हिंसक घटनाओं और हत्याओं पर चुप्पी साध लेती है.

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 कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने पोस्ट की शुरुआत सीधे अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए की. उन्होंने लिखा कि PDA की माला जपने वाले नेता राजभर समाज के मुद्दों पर मौन क्यों हैं? उन्होंने दावा किया कि पिछले एक वर्ष में राजभर समाज से जुड़े जिन हत्या के मामलों की चर्चा हुई, उनमें समाजवादी पार्टी से जुड़े लोगों की भूमिका सामने आई.

इन घटनाओं का किया जिक्र

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1. 26 जनवरी 2025, श्रावस्ती: पूरेमंशाराम गांव में संजय राजभर की हत्या का मामला. राजभर का दावा है कि इसमें एक सपाई का नाम सामने आया.

2. 16 जनवरी 2026, जौनपुर: खेतासराय क्षेत्र में सुनील राजभर की हत्या के मामले में जीशान के खिलाफ केस दर्ज.

3. 14 फरवरी 2026, महराजगंज: श्यामदेउरवा में 15 वर्षीय अंकुश राजभर की हत्या का जिक्र, जिसमें रामनरेश यादव का नाम आया.

4. 28 मार्च 2026, बाराबंकी: टिकैतनगर में आइसक्रीम विक्रेता बबलू राजभर की हत्या का मामला, जिसमें शंकर यादव पर आरोप लगा.

5. 20 अप्रैल 2026, देवरिया: भटनी क्षेत्र में सूरज राजभर की हत्या का जिक्र, जिसमें अशोक यादव का नाम.

6. 29 मई 2026, मऊ: हलधरपुर में राजजन्म राजभर की हत्या का मामला, जिसमें रामबदन यादव का नाम.

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राजभर ने पूछे तीखे सवाल

इन घटनाओं का हवाला देते हुए राजभर ने सवाल उठाया कि PDA की राजनीति करने वाली समाजवादी पार्टी राजभर समाज के लोगों के साथ हुई इन घटनाओं पर खुलकर आवाज क्यों नहीं उठाती. उनका आरोप है कि राजनीतिक रूप से अनुकूल मामलों में सपा नेतृत्व सक्रिय दिखता है, लेकिन ऐसे मामलों में चुप्पी साध लेता है.

कच्चा-चिट्ठा खोलने की चेतावनी

पोस्ट के अंत में राजभर ने कहा कि वह आगे भी समाजवादी पार्टी और उसके नेताओं से जुड़े मुद्दों को उठाते रहेंगे और “एक-एक कच्चा-चिट्ठा” जनता के सामने लाने का काम करेंगे. बता दें कि ओम प्रकाश राजभर पिछले कुछ समय से अखिलेश यादव के PDA फॉर्मूले की लगातार आलोचना कर रहे हैं. उनका कहना है कि सपा के PDA मॉडल में गैर-यादव पिछड़ी जातियों की कोई जगह नहीं है. उनका काम केवल दरी बिछाना और भीड़ जुटाना है. जबकि पीडीए में केवल एक ही जाति और धर्म का दबदबा है.