उत्तर प्रदेश के नोएडा में उस वक्त सियासी हलचल तेज हो गई, जब समाजवादी पार्टी के नेताओं को पुलिस ने हाउस अरेस्ट कर लिया. यह सभी नेता नोएडा में प्रदर्शन कर रही श्रमिकों से मुलाकात करने जा रहे थे पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोकते हुए पहले डीएनडी बॉर्डर पर ही रोक लिया और बाद में पुलिस लाइन ले जाया गया.

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बताया जा रहा है कि सपा का एक प्रतिनिधिमंडल मजदूरों की समस्याओं को समझने और उनके समर्थन में मौके पर पहुंचने वाला था लेकिन प्रशासन ने कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए उनकी एंट्री रोक दी.

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ये नेता शामिल थे

इस प्रतिनिधिमंडल में सपा के कई बड़े और सक्रिय नेता शामिल थे. इनमें माता प्रसाद पांडे, अतुल प्रधान, सुधीर भाटी, आश्रय गुप्ता, शाहिद मंजूर, कमाल अख्तर, पंकज मलिक, शशांक यादव, फकीरचंद, राजकुमार भाटी, वीर सिंह यादव और सुनील चौधरी जैसे प्रमुख नेता शामिल थे. यह सभी नेता मजदूरों के मुद्दों को लेकर एकजुट होकर नोएडा पहुंच रहे थे जिससे राजनीतिक माहौल और ज्यादा गर्म हो गया.

सपा नेताओं ने लगाया पुलिस पर आरोप

डीएनडी बॉर्डर पर पुलिस और सपा नेताओं के बीच काफी देर तक बहस और नोंकझों का माहौल बना रहा. भारी पुलिस बल पहले से देना था और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार था. नेताओं ने आरोप लगाया है कि उन्हें जानबूझकर रोका जा रहा है ताकि मजदूरों की आवाज दबाई जा सके.

वहीं पुलिस अधिकारियों का कहना था कि यह कदम सिर्फ शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया था. दरअसल नोएडा में श्रमिक अपने वेतन और अन्य मांगों को लेकर पिछले कई दिनों से प्रदर्शन कर रहे थे. इसी के समर्थन में सपा ने एक प्रतिनिधिमंडल गठित किया, जिसे राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देश पर मजदूरों से मिलने भेजा गया था. सपा नेताओं का कहना है कि सरकार मजदूरों की समस्याओं को नजर अंदाज कर रही है और उनकी आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है.

पुलिस ने किया हाउस अरेस्ट

पुलिस ने सभा नेताओं को आगे बढ़ने से रोकने के बाद उन्हें हाउस अरेस्ट कर लिया समाजवादी पार्टी के कुछ नेताओं का कहना है कि रात में ही नोएडा और ग्रेटर नोएडा समेत अन्य जगहों पर पुलिस ने उन्हें हाउस अरेस्ट कर रखा था. आज एक बड़े नेताओं का प्रतिनिधिमंडल नोएडा आ रहा था, जहां उन्हें डंडी पर ही रोक लिया गया और उनको अरेस्ट करके पुलिस लाइन ले जाया गया.

कानून-व्यवस्था बिगड़ने का खतरा

प्रशासन का कहना है कि बिना अनुमति बड़ी संख्या में नेताओं के आने से कानून व्यवस्था बिगड़ सकती थी इसलिए यह कदम जरूरी था. इस पूरे घटनाक्रम के बीच भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी यानी CPM का प्रतिनिधिमंडल भी श्रमिकों से मिलने के लिए पहुंचा. हालांकि पुलिस ने उन्हें भी डीएनडी बॉर्डर पर रोक दिया. जिसके बाद CPM नेता वहीं धरने पर बैठ गए. इससे माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया. इस घटना के बाद राजनीतिक बयान बाजी भी तेज हो गई सपा नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष को दबाने और लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन करने का काम कर रही है. जबकि  प्रशासन और सत्ताधारी पक्ष का कहना है कि यह कार्रवाई पूरी तरह कानून व्यवस्था बनाए रखने के तहत की गई है, और किसी को भी नियमों से ऊपर नहीं रखा जा सकता.

अब इस पूरे मामले के बाद आने वाले दिनों में राजनीतिक गतिविधियों और तेज होने के संकेत हैं. सपा इस मुद्दे को बड़ा बनाकर सरकार को भेजने की तैयारी में है, जबकि प्रशासन अपनी कार्रवाई को सही ठहरा रहा है.

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