उत्तर प्रदेश के नोएडा के सेक्टर-94 में एक बार फिर प्राधिकरण की लापरवाही ने एक युवा जिंदगी निगल ली. बुधवार को खुले पड़े निर्माण स्थल के पानी से भरे गहरे गड्ढे में डूबकर छात्र हर्षित भट्ट की मौत हो गई एक ऐसी जगह, जहां वह पहले भी कई बार आ चुका था. पुलिस के मुताबिक, एग्जाम खत्म होने के बाद हर्षित अपने दोस्तों के साथ पार्टी करने यहां पहुंचा था. पार्टी के बाद गड्ढे में भरे पानी में नहाने के लिए उतरा, लेकिन कुछ ही मिनटों में हालात बदल गए. पानी की गहराई का अंदाजा न होने की वजह से हर्षित डूब गया.
सूचना मिलते ही पुलिस, NDRF, SDRF और गोताखोर मौके पर पहुंचे. काफी देर की मशक्कत के बाद हर्षित को बाहर निकाला गया और अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. उसके साथ मौजूद बाकी दोस्तों को सुरक्षित बचा लिया गया था.
ग्राउंड रिपोर्ट में चौंकाने वाला सच
इस पूरे मामले में एबीपी न्यूज़ की जमीनी पड़ताल में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं. एबीपी न्यूज की पड़ताल में ये पता चला है कि हर्षित बुधवार को इस जगह पर पहली बार नहीं आया था, बल्कि वह पहले भी कई बार अपने दोस्तों के साथ यहां आ चुका था. उसके सोशल मीडिया अकाउंट पर 7 और 11 मार्च को पोस्ट की गई तस्वीरें इसकी पुष्टि करती हैं, जिनमें वह उसी लोकेशन पर नजर आ रहा है, जहां उसकी पानी से भरे गड्ढे में गिरने से मौत हुई है.
एबीपी न्यूज की पड़ताल के दौरान यह भी सामने आया कि जिस जगह पर यह हादसा हुआ, वहां तक पहुंचना इतना आसान नहीं है. अलग-अलग रास्तों से लोग इस निर्माण स्थल तक पहुंच सकते हैं, लेकिन सबसे हैरानी की बात यह है कि पूरे रस्ते में कहीं भी न तो बैरिकेडिंग है, न कोई सुरक्षा गार्ड, न पुलिस की गश्त और न ही किसी तरह का कोई चेतावनी बोर्ड लगा है.
जिम्मेदारों पर उठ रहे सवाल
यानी ये एक ऐसा खतरनाक स्थान है, जहां गहरे गड्ढे में पानी भरा हुआ है, लेकिन वहां आम लोगों की आवाजाही पर कोई रोक-टोक नहीं है. स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि यहां अक्सर युवक इकट्ठा होते हैं और पार्टी करते हैं, पिकनिक करते है लेकिन जिम्मेदार एजेंसियों ने कभी इसे गंभीरता से नहीं लिया है.
UPRNN की है जमीन
वहीं बताया ये भी जा रहा है कि यह जमीन यूपीआरएनएन (उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम) की है और लंबे समय से विवादित होने के कारण ये मामला कोर्ट में लंबित चल रहा है. हालांकि, कानूनी विवाद के बावजूद भी यहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होना कई बड़े सवाल तो जरूर खड़े करता है.
हादसे के बाद पुलिस ने हर्षित का पोस्टमार्टम कर आज उसका शव परिवार वालों को सौंप दिया था, जिसके के बाद आज परिवार के द्वारा हर्षित का अंतिम संस्कार हिंडन श्मशान घाट में कर दिया गया है. हर्षित के परिवार में माता-पिता और उसकी एक छोटी बहन हैं.
एबीपी न्यूज़ की पड़ताल ने जिस लापरवाही को उजागर किया है, वो साफ इशारा करती है कि ये हादसा टाला जा सकता था. लेकिन अब देखना ये है कि जो इस हादसे के जिम्मेदार है उन पर कार्रवाई होती है? या फिर ये ‘मौत का गड्ढा’ यूंही खुला रहेगा और अपने अगले शिकार का इंतजार करता रहेगा?