नोएडा के सेक्टर 150 में बीते शुक्रवार (16 जनवरी) की शाम नाले में गिरने से 26 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनयर युवराज मेहता की मौत हो गई थी. घना कोहरा होने की वजह से उसे रास्ता नहीं दिखा और युवराज की गाड़ी नाले में जा गिरी. समय से मदद न पहुंचने की वजह से प्रशासन पर बड़ी लापरवाही के आरोप लगे. वहां न तो कोई साइनबोर्ड था और न ही अलर्ट लिखा गया था. अगर समय रहते युवराज के पास मदद पहुंच गई होती तो आज वह अपने माता-पिता के पास सकुशल होता.
प्रशासन की लापरवाही का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि इंजीनियर हादसे के कुछ दिन पहले ही उसी जगह पर एक ट्रक भी हादसे का शिकार हुआ था. 31 दिसंबर की देर रात ट्रक के टकराने की वजह से यह नाला टूट गया था. अगर नाले की उस समय मरम्मत कर दी गई होती तो यह जानलेवा हादसा टाला जा सकता था.
हादसे के चौथे दिन निकाली गई युवराज की कार
हादसे के चौथे दिन, मंगलवार 20 जनवरी को युवराज मेहता की कार नाले से निकाली गई. गाड़ी को ढूंढने की कोशिशें बहुत समय से चल रही थीं, लेकिन सफलता मंगलवार को हासिल हुई. इंजीनियर की कार को निकाले जाने का भी वीडियो सामने आया है, जिसमें देखा गया कि गाड़ी का सनरूफ खुला हुआ था. कार झाड़ से लिपटी हुई थी और उसका बोनट भी खुला हुआ था.
बता दें, युवराज खुद को बचाने के लिए दो घंटे तक संघर्ष करता रहा. उस दौरान वह कार की छत पर आया और लोगों से मदद की अपील करता रहा. वह हेल्प-हेल्प चिल्लाता रहा और अपने फोन के टॉर्च से अपनी लोकेशन बताता रहा लेकिन मदद समय पर उसके पास नहीं पहुंची. इसी वजह से युवराज की गाड़ी की सनरूफ खुली रही होगी.
कोहरे की वजह से ही हुआ था ट्रक हादसा
इससे स्पष्ट होता है कि कहीं न कहीं नोएडा प्राधिकरण के संबंधित अधिकारियों की लापरवाही रही है, क्योंकि ट्रक हादसे वाले दिन भी पुलिस वीडियो में दिखाई दे रही है. ट्रक का हादसा भी कोहरे के चलते ही हुआ था. वीडियो में साफ तौर पर कोहरा दिखाई दे रहा है, लेकिन वहां कोई साइनबोर्ड या बैरिकेडिंग नहीं है.
ट्रक ड्राइवर से ही नाले की मरम्मत के पैसे मांगे
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रक ड्राइवर का नाम गुरविंदर सिंह बताया जा रहा है. उनका कहना है कि उनकी किस्मत अच्छी थी कि वह बच गए, लेकिन प्रशासन की लापरवाही से युवराज जैसे कितने और लोगों को मरना पड़ेगा? गुरविंदर सिंह ने हादसे वाला दिन याद करते हुए बताया कि वहां न तो कोई साइनबोर्ड था और न ही बैरिकेडिंग लगे थे. उन्हें लगा कि आगे भी सड़क होगी, लेकिन नाला होने की वजह से उनके ट्रक के अगले पहिये उसमें फंस गए. रात 12 बजे ट्रक फंसा और अगले चार घंटे तक वहीं फंसा रहा.
ट्रक ड्राइवर ने बताया कि 2-3 पुलिसकर्मी वहां आए तो थे लेकिन मदद नहीं मिली. अगले दिन दोपहर में नोएडा अथॉरिटी की टीम आई और उल्टा गुरविंदर सिंह से ही पूछने लगी कि इस टूटे नाले की मरम्मत का पैसा कौन देगा?