नोएडा में श्रमिक आंदोलन के दौरान हिंसा, आगजनी का मामला, 3 आरोपियों की पुलिस कस्टडी रिमांड मंजूर
Noida News: कोर्ट ने कहा आंदोलन के दौरान सुनियोजित तरीके से हिंसा भड़काई गई थी. आरोपियों ने मजदूरों को उकसाने, भीड़ को भड़काने और औद्योगिक गतिविधियों को ठप करने के उद्देश्य से साजिश रची थी.

ग्रेटर नोएडा के थाना फेस-2 क्षेत्र में श्रमिक आंदोलन के दौरान हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ के मामले में न्यायालय ने तीन आरोपियों सत्यम वर्मा, हिमांशु ठाकुर और आदित्य आनंद की पुलिस कस्टडी रिमांड मंजूर कर ली है.
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (तृतीय) विरेन्द्र अग्रवाल की अदालत ने आदेश में कहा कि मामले की विवेचना के लिए आरोपियों से पूछताछ और डिजिटल साक्ष्य की बरामदगी आवश्यक है. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पुलिस कस्टडी 29 अप्रैल सुबह 9 बजे से शुरू होकर 30 अप्रैल शाम 6 बजे तक प्रभावी रहेगी.
कोर्ट ने इसके साथ ही विवेचक को निर्देश दिया गया है कि आरोपियों को कस्टडी में लेने और वापस जेल भेजने से पहले उनका चिकित्सकीय परीक्षण
अनिवार्य रूप से कराया जाए.
सुनियोजित तरीके से हिंसा भड़काने का आरोप
नोएडा में हुए श्रमिकों के प्रदर्शन के मामले में थाना फेस-2 में दर्ज मुकदमे में कई गंभीर धाराओं के साथ-साथ आपराधिक कानून संशोधन अधिनियम और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है. आरोप है कि आंदोलन के दौरान सुनियोजित तरीके से हिंसा भड़काई गई थी. आरोपियों ने मजदूरों को उकसाने, भीड़ को भड़काने और औद्योगिक गतिविधियों को ठप करने के उद्देश्य से साजिश रची थी.
इस साजिश में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, विशेषकर टेलीग्राम और व्हाट्सएप ग्रुप्स का इस्तेमाल किया गया. पुलिस ने अदालत में दलील दी कि आरोपियों के कब्जे से लैपटॉप, सीपीयू और मोबाइल फोन की बरामदगी बेहद जरूरी है. इन डिवाइसों में मौजूद डाटा से यह पता लगाया जा सकेगा कि किस प्रकार हिंसा की योजना बनाई गई, किस-किस को जोड़ा गया और किस तरह संदेशों के जरिए भीड़ को उकसाया गया.
आरोपियों की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त सामग्री, पंपलेट, बैनर और कथित तौर पर बांटी गई हिंसक सामग्री बरामद की जा सकती है, जो जांच के लिए अहम साक्ष्य साबित होंगे.
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कस्टडी रिमांड की याचिका मंजूर
कोर्ट ने कहा कि गिरफ्तारी मेमो और अन्य दस्तावेजों से स्पष्ट है कि आरोपियों को गिरफ्तारी के कारणों से अवगत कराया गया था और पहले भी मजिस्ट्रेट द्वारा रिमांड दी जा चुकी है. ऐसे में यह तर्क स्वीकार्य नहीं है कि उन्हें कारण नहीं बताए गए. कोर्ट ने पुलिस कस्टडी रिमांड मंजूर करते हुए अदालत ने कुछ अहम शर्तें भी लगाई हैं. आरोपियों के अधिवक्ता उचित दूरी से पूरी कार्यवाही देख सकेंगे, लेकिन जांच में हस्तक्षेप नहीं करेंगे.
आरोपियों के वकीलों अली जिया कबीर, माणिक गुप्ता, तनवीर मोहम्मद अली और उमेश कुमार ने अदालत से मांग की थी कि उन्हें कस्टडी के दौरान मौजूद रहने और कार्यवाही देखने की अनुमति दी जाए. इस पर कोर्ट ने कहा कि वकील मणिक गुप्ता उचित दूरी बनाकर कार्यवाही देख सकते हैं, लेकिन जांच प्रक्रिया में बाधा नहीं डालेंगे.
























