नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Noida International Airport) से कमर्शियल उड़ानें 15 जून से शुरू होनी है. आज इसकी तैयारियों को परखने की दिशा में एक और ऐतिहासिक कदम आगे बढ़ाया गया है. नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट ने अपने ओआरएटी यानी 'ऑपरेशनल रेडीनेस, एक्टिवेशन और ट्रांज़िशन' प्रोग्राम के तहत देश की दिग्गज विमानन कंपनी इंडिगो और अपने मुख्य पार्टनर्स के साथ मिलकर 'एयरक्राफ्ट टर्नअराउंड' का एक पूरा और सफल ट्रायल किया है.

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नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का यह रनवे और एयरसाइड का इलाका आज पूरी तरह से एक्शन में नजर आया. कमर्शियल ऑपरेशंस की शुरुआत से पहले हवाई अड्डे की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण ट्रायल का आयोजन किया गया. इस ट्रायल का मुख्य मकसद यह देखना था कि जब एक विमान रनवे पर लैंड करता है, तो उसके बाद की तमाम प्रक्रियाओं में कितना तालमेल रहता है.

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आधुनिक सुविधाओं की बारीकी से जांच

ट्रायल के दौरान ठीक वैसे ही हालात बनाए गए, जैसे असली उड़ानों के समय होते हैं. इसमें विमान को गाइड करने वाले वीडीजीएस (VDGS) सिस्टम, पैसेंजर बोर्डिंग ब्रिज, ग्राउंड पावर और प्री-कंडीशंड एयर जैसी आधुनिक सुविधाओं की बारीकी से जांच की गई. इसके अलावा, यात्रियों के सामान यानी बैगेज और कार्गो हैंडलिंग की पूरी प्रक्रिया को भी दोहराया गया.

स्टेकहोल्डर्स और सिस्टम के बीच का तालमेल रहा सफल

हवाई सफर की तैयारियों को संपूर्ण बनाने के लिए इन-फ्लाइट कैटरिंग, ग्राउंड हैंडलिंग गतिविधियों और सबसे महत्वपूर्ण—विमान में री-फ्यूलिंग यानी ईंधन भरने की प्रक्रिया का भी कड़ा मूल्यांकन किया गया. एयरपोर्ट अथॉरिटी के मुताबिक, सभी स्टेकहोल्डर्स और सिस्टम के बीच का तालमेल बेहद शानदार और सफल रहा. जेवर एयरपोर्ट से बहुत जल्द व्यावसायिक उड़ानें शुरू होनी हैं, और उस दिशा में आज का यह सफल ट्रायल एक मील का पत्थर साबित होने वाला है.

इस सफल ट्रायल के बाद अब वो दिन दूर नहीं जब दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोग जेवर स्थित इसी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से दुनिया भर के लिए उड़ान भर सकेंगे.

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