नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत मामले की जांच रिपोर्ट आ गई है. तीन सदस्यों की एसआईटी की टीम ने ये जांच रिपोर्ट शासन को सौंप दी है. सूत्रों के मुताबिक एसआईटी ने रिपोर्ट में माना है कि युवराज को बचाने में वहां मौजूद बचाव दल से चूक हुई है. इसके लिए एक दर्जन अधिकारी और कर्मचारियों को ज़िम्मेदार माना गया. 

इंजीनियर युवराज मेहता की मौत मामले की जाँच के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर एसआईटी की जांच बिठाई गई थी, जिसकी रिपोर्ट टीम ने अब शासन को सौंप दी है. सूत्रों के मुताबिक एसआईटी ने जांच में माना है कि युवराज को बचाने आई टीम से चूक हुई है. 

एसआईटी ने माना युवराज को बचाने में हुई चूक

रिपोर्ट में प्राधिकरण, एसडीआरएफ, दमकल की टीम और पुलिस के एक दर्जन अधिकारी और कर्मचारियों को जिम्मेदार माना गया है. इस रिपोर्ट के बाद अब जल्द ही दोषी पाए जाने वालों पर निलंबन और विभागीय कार्रवाई की जा सकती है. प्राधिकरण और पुलिस प्रशासन की ओर से 700 पेजों की रिपोर्ट समिति को सौंपी गई थी. इसमें विभागों ने एक दूसरे को जिम्मेदार ठहरने का प्रयास किया है. 

युवराज को बचाने में क्यों लगे दो घंटे?

एसआईटी की जांच के दौरान जल भराव से जुड़ी प्लानिंग स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज सिस्टम कंट्रोल रूम की मॉनिटरिंग रेस्क्यू रिस्पांस टाइम और मौके पर तैनात अधिकारियों की भूमिका की विस्तृत जांच हुई. सबसे अहम सवाल रहा है कि हादसे के दौरान युवराज को बाहर निकलने में 2 घंटे क्यों लग गए?

ये घटना 16 जनवरी की रात की है जब ग्रेटर नोएडा सेक्टर 150 में रहने वाले  सॉफ़्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता गुड़गांव अपने दफ़्तर से लौट रहे थे. घना कोहरा होने की वजह से उनकी कार हादसे का शिकार हो गई और एक गड्ढे में जा गिरी, जिसके बाद युवराज ने पिता को फ़ोन कर उनसे मदद मांगी थी. लेकिन पौने दो घंटों के बाद भी उसे नहीं बचाया जा सका. 

इस घटना के बाद जमकर बवाल देखने को मिला था. सीएम योगी के निर्देश पर 20 जनवरी को इसकी जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी की टीम का गठन किया था. इस टीम ने मंगलवार को शासन को अपनी जाँच रिपोर्ट सौंप दी है.