नेपाल में आए भीषण बाढ़ के बाद अब दुनिया भर में प्राकृतिक आपदा और उससे बचाव को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो चुका है. भारत के भी अनेक ऐसे भाग हैं जिस पर प्राकृतिक आपदा का खतरा मंडराता रहता है. विशेष तौर पर जलस्तर में बढ़ोतरी, बाढ़, सहित अन्य प्राकृतिक आपदा से जीवन को कैसे सुरक्षित किया जाए, अब यह बेहद आवश्यक विषय बन चुका है. अब इस विषय को लेकर एबीपी लाइव ने पर्यावरण वैज्ञानिक और नदी विशेषज्ञ प्रोफेसर बी. डी. त्रिपाठी से खास बातचीत की. 

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ग्लोबल वार्मिंग इसकी प्रमुख वजह

प्रोफेसर बी. डी. त्रिपाठी  ने ABP Live से बातचीत के दौरान बताया कि - निरंतर बढ़ता ग्लोबल वार्मिंग ग्लेशियर को सीधे तौर पर प्रभावित कर रहा है और हाल के दिनों में हमने जो विनाशकारी बाढ़ को देखा है वह इसकी प्रमुख वजह है. और अन्य भी कई ऐसे प्राकृतिक आपदा रहे हैं जो सीधे तौर पर वातावरण में बढ़ते तापमान की वजह से हुए. वातावरण में वह गैस बढ़ रहे हैं जो सीधे तौर पर आपके पर्यावरण को हानि पहुंचा रहे हैं और इसी की वजह से यह प्राकृतिक आपदा और विनाशकारी रूप ले रही है.

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प्रोफेसर बी. डी. त्रिपाठी के मुताबिक, सबसे प्रमुख बात की इसको लेकर अब सटीक गणना भी नहीं हो पा रही है. जिसकी मदद से लोगों को समय रहते सूचना दिया जा सके. सटीक गणना ना होने की वजह क्लाइमेटिक चेंज का सही आकलन ना हो पाना है. राजस्थान के उन क्षेत्रों में बारिश होना जो अक्सर सुखा की चपेट में रहते हैं जबकि जो क्षेत्र अच्छी बारिश के लिए जाने जाते हैं इस बार वहां बारिश कम होना. 

यह जरूरी है उपाय

प्रोफेसर बी. डी.  त्रिपाठी ने सलाह देते हुए कहा कि - कम से कम हम वह कार्य न करें जो प्रकृति के सीधे तौर पर विपरीत हो. जहरीली गैस जो हमारे पर्यावरण को प्रभावित कर रही हैं, उसे हर हाल में रोका जाए. ग्लोबल वार्मिंग पर जल्द ही वृहद स्तर पर निर्णय लेने की आवश्यकता है. सबसे प्रमुख बात की नदियों को दूषित होने से रोकने से लेकर अधिक से अधिक पौधारोपण करने का 100% जमीन पर प्रभाव दिखने वाला अभियान चलाना चाहिए.

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