हरिद्वार में पहले नवरात्र की धूम है यहां के मंदिरों में भक्तों को सैलाब उमड़ा हुआ है. हर कोई मां को प्रसन्न करने और रिझाने का प्रयास कर रहा है. हरिद्वार में वैसे तो मां के कई मंदिर हैं और शिवालिक पर्वतमाला पर मां मनसा देवी का मंदिर स्थित है. मान्यता है कि नवरात्र में जो भी सच्चे मन से मां दुर्गा के अनेक रूपों की पूजा अर्चना करता है, उसकी सभी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं. नवरात्रों में मां के अनेक रूपों की पूजा करने का अलग महत्व भी होता है. 

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शास्त्रों में ऐसी मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से मनसा देवी की पूजा आराधना कर लेता है उसकी सभी कामनाएं पूरी हो जाती हैं और उसके सभी कष्ट और दुख दूर हो जाते हैं. मां मनसा उनका वरन कर लेती हैं. यही नहीं, नवरात्र में मनसा देवी की आराधना करने का विशेष लाभ होता है. तभी हरिद्वार के स्थानीय लोगों के साथ-साथ देश के कोने कोने से श्रदालु नवरात्रों में मां मनसा देवी के दर्शन करने के लिए आते हैं.

पुराणों के अनुसार, प्राचीन काल में महिषासुर नामक राक्षस ने देवताओं और मनुष्यों पर भयंकर अत्याचार ढा रखे थे. जब महिषासुर के अत्याचार से सभी दुखी हो गए तब देवताओं के मन में आया कि ऐसी कोई शक्ति का अवतरण होना चाहिए जो महिषासुर नामक राक्षस का संहार कर सके. देवताओं के मन से निकली प्रार्थना पर मां दुर्गा ने मनसा अवतार लिया और महिषासुर के अत्याचारों से मुक्ति दिलाई. 

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मां दुर्गा के इस स्वरूप का अवतार मन से हुआ था. इसीलिए मां के इस स्वरूप का नाम मनसा देवी पड़ा और मां मनसा देवी तभी से शिवालिक पर्वत पर विराजमान हैं. 

मंदिर समिति के अध्यक्ष महेंद्र उदयपुर का कहना है कि मनसा देवी शिव की पुत्री हैं. जो नवरात्रों में मां की पूजा करने आता है उसकी मनोकामना पूरी होती है. आज के टाइम में मनसा देवी जाने के लिए उड़न खटोला और पैदल वाले मार्ग से श्रद्धालु मां मनसा देवी के दर्शन करने के लिए जाते हैं.