प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी 'नमामि गंगे योजना' का असर अब गाजीपुर में जमीनी स्तर पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है. वर्षों पहले शुरू की गई सीवरेज और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) परियोजना अब पूरी तरह से अमल में आने लगी है. इसके चलते शहर के घरों से निकलने वाला गंदा पानी अब सीधे गंगा नदी में नहीं जाएगा, बल्कि पाइपलाइन के माध्यम से सीवरेज सिस्टम से होते हुए एसटीपी तक पहुंचेगा, जहां उसका वैज्ञानिक तरीके से शोधन (ट्रीटमेंट) किया जाएगा.
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गाजीपुर में आयोजित एक जनसभा के दौरान इस एसटीपी परियोजना का लोकार्पण किया था. अब इस परियोजना के संचालन से शहर में गंगा को प्रदूषण से बचाने की दिशा में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है.
मेरठ में माता बनी कुमाता, प्रेमी के साथ मिलकर की 6 माह के बच्चे की हत्या
पंपिंग स्टेशन तक भेजा जा रहा मलजल
पंपिंग स्टेशन इंचार्ज जितेंद्र यादव के अनुसार, शहर के विभिन्न मोहल्लों और घरों से निकलने वाला मलजल भूमिगत सीवर पाइपलाइन के माध्यम से स्टीमर घाट स्थित पंपिंग स्टेशन तक पहुंचाया जा रहा है. यहां अत्याधुनिक पंपों की सहायता से इस पानी को दबाव (प्रेशर) के जरिए गोरा बाजार स्थित केंद्रीय पंपिंग स्टेशन भेजा जाता है.
सीवरेज जल को शुद्ध कर गंगा में छोड़ा जाएगा
गोरा बाजार केंद्र पर पूरे शहर का सीवरेज जल एकत्रित किया जाता है. इसके बाद वहां से पाइपलाइन के माध्यम से लगभग 23 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) क्षमता वाले देवकठिया स्थित सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) तक पहुंचाया जाता है. एसटीपी में आधुनिक तकनीक से पानी का शोधन किया जाता है. शोधन के बाद ही इस स्वच्छ जल को पास से बहने वाली बेसों नदी के माध्यम से गंगा नदी में छोड़ा जाता है.
गंगा के प्रदूषण में कमी आने की उम्मीद
इस व्यवस्था के लागू होने से अब शहर के नालों के जरिए गंगा में केवल वर्षा का पानी या घरों की छतों से निकलने वाला वर्षा जल ही पहुंचेगा. घरेलू गंदा पानी पूरी तरह सीवरेज नेटवर्क के माध्यम से एसटीपी तक पहुंचकर शुद्ध किया जाएगा, जिससे गंगा के प्रदूषण में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है.
पंपिंग स्टेशन इंचार्ज जितेंद्र यादव ने बताया कि भविष्य में वर्षा जल (स्टॉर्म वाटर) के बेहतर प्रबंधन के लिए भी अलग योजना तैयार की जा रही है. इसके तहत ऐसा सिस्टम विकसित करने की योजना है, जिससे बारिश का पानी भी व्यवस्थित रूप से एकत्रित होकर आवश्यकतानुसार ट्रीटमेंट सिस्टम तक पहुंच सके. इससे गाजीपुर में नमामि गंगे योजना का उद्देश्य और अधिक प्रभावी ढंग से साकार होगा.
गंगा की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को नई मजबूती
नमामि गंगे परियोजना के प्रभावी संचालन से गाजीपुर शहर में गंगा की स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को नई मजबूती मिलेगी. लंबे समय से जिस सीवरेज परियोजना का इंतजार था, वह अब धरातल पर उतर चुकी है और आने वाले समय में गाजीपुर की पहचान एक स्वच्छ और प्रदूषणमुक्त गंगा तट वाले शहर के रूप में और मजबूत होने की उम्मीद है.
अलीगढ़ में ऑनर किलिंग की आशंका, DM के आदेश पर कब्र से निकाला लड़की का शव
