मुजफ्फरनगर में निर्माणाधीन मस्जिद की सील खोले जाने की मांग वाली याचिका पर शनिवार (28 मार्च) को इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. अदालत ने राज्य सरकार से पूछा कि विधि के किस अधिकार के अधीन राज्य किसी पूजा-स्थल को सील कर सकता है? कानून के किस प्रावधान के तहत किसी पूजा स्थल से संबंधित मामलों में राज्य से पूर्व अनुमति प्राप्त करना जरूरी है?

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कोर्ट ने राज्य से ये भी पूछा कि क्या कानून के तहत किसी निर्माणाधीन पूजा स्थल को बिना कोई पूर्व सूचना जारी किए अथवा याचिकाकर्ता को सुनवाई का अवसर दिए बिना सील करने का कोई अधिकार मौजूद है?

HC में याचिका देकर मस्जिद की सील हटाने की मांग

अदालत ने सरकारी वकील को राज्य सरकार द्वारा एक एफिडेविट के साथ खास निर्देश लेकर अगली सुनवाई तक कोर्ट के सामने पेश होने को कहा. याचिकाकर्ता अहसान अली की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में दाखिल याचिका के माध्यम से निर्माणधीन मस्जिद की सील हटाने की मांग की गई है.

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अहसान अली की याचिका पर HC में हुई सुनवाई

यह आदेश जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की डिविजन बेंच ने अहसान अली की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया. याचिकाकर्ता ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर करते हुए मांग की है कि मुजफ्फरनगर के ग्राम भोपा, परगना भोकरहेड़ी, तहसील जानसठ स्थित प्लॉट संख्या 780 का वो वैध स्वामी है, जिसे उसने 20 सितंबर 2019 को खरीदा था. 

याचिकाकर्ता के वकील ने क्या दी दलील?

याचिकाकर्ता के वकील जगदीश प्रसाद मिश्रा ने कोर्ट में दलील दी कि याची खरीदी गई संपत्ति पर एक मस्जिद का निर्माण करवा रहे हैं, लेकिन  राज्य के अधिकारियों द्वारा उस संपत्ति को इस आधार पर सील कर दिया गया कि यह निर्माण अवैध है और इसके लिए सक्षम प्राधिकारी से कोई पूर्व अनुमति प्राप्त नहीं की गई है.

याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट से कहा कि परिसर को सील किए जाने से पहले याचिकाकर्ता को न तो कोई नोटिस दिया गया और न ही सुनवाई का कोई अवसर प्रदान किया गया. याचिकाकर्ता ने कोर्ट से गुहार लगाई कि कोर्ट प्रतिवादी अधिकारियों को उस संपत्ति की सील हटाने, याचिकाकर्ता को उस पर निर्माण कार्य करने की अनुमति देने और विधि के अनुसार उस परिसर का उपयोग पूजा करने के लिए करने की अनुमति देने का निर्देश दें.