पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) कार्यालय पर मंगलवार देर रात उस वक्त हड़कंप मच गया, जब उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल अचानक धरने पर बैठे शिक्षकों के बीच पहुंच गए. रात करीब 12 बजे धरना स्थल पर पहुंचे मंत्री ने शिक्षकों की समस्याएं सुनीं और बीएसए संदीप कुमार की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जताई. उन्होंने मौके से ही जिलाधिकारी (DM) को फोन कर पूरे प्रकरण की जांच और बीएसए के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं.
जानकारी के अनुसार, सैकड़ों शिक्षक एक शिक्षा समीक्षा के निलंबन और अन्य विभागीय समस्याओं को लेकर मंगलवार (24 फरवरी) दोपहर करीब 3:30 बजे बीएसए संदीप कुमार को ज्ञापन देने उनके कार्यालय पहुंचे थे. शिक्षकों का आरोप है कि बीएसए ने न तो उनसे मुलाकात की और न ही उनका ज्ञापन लिया. शाम 6 बजे अधिकारी और कर्मचारी अपना कार्यालय बंद कर वहां से चले गए. अधिकारियों के इस रवैये से नाराज शिक्षक रात को भी कार्यालय परिसर में धरने पर डटे रहे.
'विवादों का अखाड़ा बन गया है BSA कार्यालय'
रात में शिक्षकों के धरने की सूचना मिलते ही राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल खुद उनके बीच पहुंच गए. उन्होंने कहा कि शिक्षक उनके क्षेत्र के लोग हैं और बच्चों का भविष्य संवारने का महत्वपूर्ण काम करते हैं, इसलिए उनकी अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जा सकती. मंत्री ने मीडिया से बातचीत में तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बीएसए कार्यालय आए दिन विवादों और लड़ाई-झगड़े का अखाड़ा बना रहता है, जिससे विभाग और शासन दोनों की छवि धूमिल हो रही है. उन्होंने कहा कि व्यवस्था को सुधारना अधिकारी की जिम्मेदारी होती है, लेकिन यहां के बीएसए अपनी इस जिम्मेदारी को निभाने में पूरी तरह विफल साबित हो रहे हैं.
शिक्षकों की दो टूक: 'हमारी जाति सिर्फ शिक्षक है'
धरने पर बैठे शिक्षकों ने अपना दर्द बयां करते हुए स्पष्ट रूप से कहा कि उनकी जाति सिर्फ 'शिक्षक' है. वे समाज में फैलाए जा रहे जातिवाद या बिरादरीवाद के मुद्दों से बेहद आहत हैं. शिक्षकों ने आरोप लगाया कि बीएसए की दूषित कार्यप्रणाली के कारण ही समाज के विभिन्न वर्ग अलग-अलग दिन प्रदर्शन करने को मजबूर हैं. हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षक किसी भी सूरत में समाज या बच्चों के बीच जातिगत भेदभाव पनपने नहीं देंगे.
दो दिन के लिए धरना स्थगित
मंत्री कपिल देव अग्रवाल के कड़े रुख, उनके ठोस आश्वासन और जिलाधिकारी से हुई फोन वार्ता के बाद शिक्षकों ने अपना धरना फिलहाल दो दिनों के लिए स्थगित कर दिया है. हालांकि, शिक्षकों ने यह स्पष्ट चेतावनी भी दी है कि यदि इस अवधि में उनकी मांगों पर उचित और न्यायपूर्ण कार्रवाई नहीं हुई, तो वे आगे की रणनीति तैयार कर फिर से बड़ा आंदोलन करेंगे.
