उत्तर प्रदेश में हुए SIR के ड्राफ्ट रोल का जो आंकड़ा सामने आया है, उसमे यह बात सामने आई है कि इस बार बड़ी संख्या में शहर में रहने मतदाताओं ने अपना नाम की मतदाता सूची में शिफ्ट करवा लिया है. मुरादाबाद में शहरी मतदाताओं ने अपने वोट ग्रामीण इलाकों में शिफ्ट कर लिए हैं, जिस कारण राजनीतिक दलों के समीकरण भी इस बार गड़बड़ा सकते हैं. शहरी मतदाताओं का गांव में वोट शिफ्ट करने का सबसे अधिक असर भारतीय जनता पार्टी पर हो सकता है, क्योंकि शहरी मतदाता भाजपा का कोर वोट बैंक माना जाता रहा है. जिन शहरी मतदाताओ ने अपने वोट गांवों में शिफ्ट किए हैं उनमे मुस्लिम मतदाताओं की संख्या में खासी है, जो सपा का वोट बैंक माना जाता रहा है.
'पंचायत चुनावों में एक-एक वोट की होती है अहमियत'
गांव में नाम शिफ्ट करने वाले वोटरों का कहना है कि गांव में पंचायत चुनावों में एक एक वोट की अहमियत होती है, इसलिए हमने अपने वोट पैतृक गांव में बनवा लिए हैं. मतदाताओं ने यह भी कहा कि उनका अपने पैतृक गांव से रिश्ता बना रहेगा, क्योंकि शहर में तो वह अपनी रोजी रोटी के लिए आ बसे हैं, बाकि रिश्तेदार और घर तो गांव में ही है. इससे चुनावों में मतदान के बहाने गांव जाना आना बना रहेगा. रामपुर के एक गांव के रहने वाले मौलाना मुहिब्बे अली नईमी बताते हैं कि वह पिछले 30 सालों से मुरादाबाद में रह कर एक मदरसा चला रहे हैं, उनके परिवार में पत्नी और दो बेटों सहित चार वोट हैं, जो पहले मुरादाबाद शहर में ही थे लेकिन अब SIR में उन्होंने अपने परिवार के चारों वोट अपने गाँव में शिफ्ट करा लिए हैं.
वोटर्स के शिफ्टिंग होने के बाद सक्रिय हुए राजनीतिक दल
बहरहाल, अब राजनितिक दलों के कार्यकर्ता वोटर लिस्टों की गहन जांच कर यह पता लगाने में जुटे हैं कि उनके मतदाता कहां-किस इलाके में कम हुए हैं और उसकी भरपाई कैसे की जाए. इसलिए राजनीतिक पार्टियों के कार्यकर्ता अपने-अपने इलाके में SIR की आपत्तियों के संशोधन और नये मतदाताओं के फार्म भरने के काम में जुट गये हैं और मतदाताओं की मदद कर रहे हैं.