YogaDayVsNamaz: योग दिवस पर सरकारी कर्मियों को ब्रेक दिए जाने पर अब सियासत शुरू हो गयी है. जी हां इस मामले पर समाजवादी पार्टी के नेता और मुरादाबाद से पूर्व सांसद डॉ एसटी हसन ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने इसे योगी सरकार का दोहरा मापदंड बताया और कहा कि जब मुस्लिम कर्मियों को जुमे की नमाज के लिए आधे घंटे का ब्रेक नहीं है तो फिर योगा डे पर क्यों? एसटी हसन मुरादाबाद में पत्रकारों से बात कर रहे थे. जहां उन्होंने ये बयान दिया.
एसटी हसन ने कहा कि योगा डे पर ब्रेक देने की कोई आवश्यकता नहीं है. कर्मचारी चाहें तो घर से योग करके भी ऑफिस आ सकते हैं. जब मुसलमानों को जुमे की नमाज के लिए आधे घंटे का ब्रेक देने से सरकार को परहेज है, तो योग के लिए विशेष ब्रेक देना कहां तक उचित है? उन्होंने कहा कि वो योग के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन सरकार को सभी धर्मों के प्रति समान व्यवहार करना चाहिए.
दोहरे रवैये पर सवाल
डॉ. हसन ने आगे कहा कि हम योग के विरोध में नहीं हैं. योग एक अच्छी चीज है लेकिन सरकार का दोहरा रवैया स्वीकार्य नहीं है. अगर योगा डे पर ब्रेक दिया जा सकता है तो जुमे की नमाज के लिए भी कर्मचारियों को छूट मिलनी चाहिए. अब देश में वो सब हो रहा है, जो पहले कभी नहीं हुआ.
'वाई-ब्रेक योगा' पर भी उठाए सवाल
यहां बता दें कि उत्तर प्रदेश सरकार ने केंद्र के आयुष मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के तहत सभी सरकारी कार्यालयों में 'वाई-ब्रेक योगा' सत्र शुरू करने का फैसला किया है. ये 5 से 10 मिनट का संक्षिप्त योग सत्र है. इसे कर्मचारियों के तनाव को कम करने और शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर करने के लिए डिजाइन किया गया है.
डॉ. हसन ने इस पहल पर भी तंज कसते हुए कहा कि सरकार की नीतियां धार्मिक आधार पर भेदभाव को बढ़ावा दे रही हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर योग के लिए समय निकाला जा सकता है, तो नमाज के लिए समय देना क्यों गलत है.
