उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में मोतीलाल नेहरु राष्ट्रीय प्रोद्योगिकी संस्थान (MNNIT) के पूर्व प्रवक्ता राजेश सिंह को इलाहबाद हाईकोर्ट ने 2006 में उनकी बर्खास्तगी के मामले में बड़ी राहत दी है. कोर्ट ने उन्हें दी गई सज़ा को अत्यधिक कठोर और असंगत करार दिया. सतह ही संस्थान के सक्षम अधिकारी के पास पुनर्विचार के लिए भेज दिया है जिससे सज़ा पर नए सिरे से विचार हो सके.
राजेश सिंह पर संस्थान की छात्रा ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था. जिसमें जांच के बाद कमेटी ने उन्हें बर्खास्त कर दिया था. हालाँकि दोनों में संबंध आपसी सहमित से बने थे, बावजूद शिक्षक जैसे पद की नैतिकता की गरिमा को ठेस पहुंचाने के लिए उन्हें कठोर सज़ा सुनाई गई.
कोर्ट ने सहमति से संबंध उत्पीड़न नहीं माना
मामले की सुनवाई कोर्ट की एकल पीठ में जस्टिस सौरभ श्याम शमशेरी ने की. जिसमें स्पष्ट किया गया कि संस्थान की पूर्व छात्रा के साथ संबंध आपसी सहमति से अनुशासनिक दृष्टि से गलत हो सकते हैं, लेकिन ये यौन उत्पीड़न की श्रेणी में नहीं आता. कोर्ट ने कहा कि संबंध सहमति से थे और छात्रा के संस्थान छोड़ने के बाद भी तीन साल तक रहे. न ही कोई आपराधिक मामला दर्ज उअर न ही कोई अन्य आरोप सिद्ध हुआ.
अपराध के मुताबिक सजा की अनुपातहीनता पर टिप्पणी
कोर्ट का भी मानना था कि राजेश सिंह शिक्षक के उच्च नैतिक मानकों का पालन नहीं किया, लेकिन बर्खास्तगी जैसी सजा अपराध के अनुपात में नहीं है. अदालत ने स्पष्ट किया कि दंड अपराध की गंभीरता के अनुरूप होना चाहिए.
क्या था पूरा मामला?
बता दें कि राजेश सिंह 1999 में MNNIT के कंप्यूटर साइंस विभाग में प्रवक्ता के रूप में तैनात हुए थे. उनके खिलाफ 2003 में एक पूर्व छात्रा ने संस्थान के निदेशक को शिकायत दी, जिसमें आरोप लगाया गया कि छात्र जीवन के दौरान उनके साथ शारीरिक संबंध बनाए गए. इसके साथ ही शिक्स्यत में यह भी मेंशन था कि दोनों के बीच संबंध सहमति से बने, प्रतीकात्मक विवाह भी हुआ.
शिकायत के बाद पांच सदसीय कमेटी ने मामले की जांच की, लेकिन तब कोई निष्कर्ष नहीं निकला. इसके बाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस की अध्यक्षता में बर्खास्तगी की सिफारिश की गयी. जिसके बाद बोर्ड ऑफ गवर्नर्स ने 28 फरवरी 2006 को राजेश सिंह को सेवा से बर्खास्त कर दिया.
फिलहाल हाईकोर्ट ने अपने आदेश में पूर्व सजा के आदेश को रद्द कर दिया और मामले को पुनर्विचार के लिए भेजा है.और दंड की कमी पर विचार करने को कहा है.