रायबरेली की ऊंचाहार विधानसभा सीट इस समय चर्चा का विषय बनी हुई है. ऊंचाहार से वर्तमान विधायक मनोज कुमार पांडे व उनके भतीजे यश पांडे के बीच जुबानी जंग ने राजनीतिक सरगर्मियां बढ़ा दी है. जहां एक तरफ ऊंचाहार सीट से तीन बार के विधायक मनोज कुमार पांडे को अपनी राजनीतिक जमीन बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है.
वहीं उनके ही भतीजे यश राकेश पांडे ने ऊंचाहार सीट पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए राजनीतिक बिसात बिछाना शुरू कर दिया है. जिसका ही परिणाम रहा कि यश पांडे ने अपने ही चाचा को धोखेबाज तक की संज्ञा दे डाली.
वैचारिक मतभेद से बड़े मुकाबले के संकेत
विधायक मनोज पांडे और उनके भतीजे यश पांडे के बीच जुबानी जंग और जबरदस्त वैचारिक मतभेद एक बड़े मुकाबले की तरफ संकेत दे रहे हैं. हालांकि इसके पहले भी पारिवारिक कलह सुर्खियों में रही है. जिसमें यश पांडे की मां भारती पांडे ने भी अपने पति राकेश पांडेय की हत्या की कीमत ले लेने का आरोप अपने ही देवर मनोज पांडे पर लगा चुकी है. बीते कुछ दिनों के घटनाक्रमों पर नजर डाला जाए तो अब पारिवारिक कलह पूरी तरह राजनीतिक लड़ाई में बदल चुकी है.
अविमुक्तेश्वरानंद की यात्रा में वीएस पांडे ने चाचा पर किया कटाक्ष
स्वामी अभी मुक्तेश्वरानंद की यात्रा के दौरान यश पांडे ने रायबरेली में उन्हें अपने आवास पर ठहराया. उन्होंने सार्वजनिक बयान दिया कि मैं सत्ता के साथ नहीं, सत्य के साथ हूं. जिसका राजनीतिक गलियारों में साफ अर्थ लगाया जा रहा है कि उनके चाचा मनोज पांडे इस समय भाजपा से विधायक हैं.
उन्होंने सनातन व शंकराचार्य का अपमान करने वाली सरकार का साथ दिया है लेकिन वह सत्ता का नहीं बल्कि सत्य का साथ दे रहे हैं. शंकराचार्य की यात्रा के दौरान भी यश पांडे अपने चाचा मनोज पांडे की घेराबंदी करने से नहीं चुके.
ऊंचाहार सीट पर तैयारी में जुट चुके हैं यश पांडे
आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए यश पांडे ने अपने ही चाचा मनोज पांडे का विरोध करते हुए राजनीतिक तैयारी शुरू कर दी है. तीन बार से विधायक रहे मनोज पांडे समाजवादी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए हैं. जिसका फायदा उनके भतीजे यश पांडे लेने की कोशिश कर रहे हैं.
अगर राजनीतिक गलियारों की चर्चा पर ध्यान दिया जाए तो ऊंचाहार विधानसभा सीट से यश पांडे समाजवादी पार्टी के टिकट से अपनी दावेदारी ठोक सकते हैं. अगर ऐसा हुआ तो एक ही परिवार के दो लोग आमने सामने होंगे. जिसमें तीन बार से विधायक मनोज पांडे के लिए अपनी साख बचाने की चुनौती होगी वही यश पांडे एक नई लकीर खींचकर राजनीति में धमाकेदार प्रवेश करने की कवायद करेगे.
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