उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में अल्पसंख्यक सरकारी छात्रवृत्ति घोटाले का खुलासा हुआ है. यहां गरीब और जरूरतमंद अल्पसंख्यक छात्रों को पढ़ाई में मदद देने के लिए बनाई गई सरकारी छात्रवृत्ति योजना को कथित तौर पर अपनी जेब भरने का जरिया बना लेने का एक गंभीर मामला सामने आया है.

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दून कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (DCET)  के प्रबंधन पर आरोप है कि उसने वर्ष 2021 से 2023 के बीच फर्जी दस्तावेजों और धोखाधड़ी के सहारे केंद्र व राज्य सरकार की अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजनाओं से करोड़ों रुपये की राशि हड़प ली. 

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शिकायत से शुरू हुआ मामला

जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी जेएस रावत ने प्रेमनगर थाने में लिखित शिकायत देते हुए खुलासा किया था कि वित्तीय वर्ष 2021-22 और 2022-23 में बांटी गई छात्रवृत्तियों की जांच के दौरान कई शिक्षण संस्थानों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं पकड़ी गईं. मामले की गंभीरता को देखते हुए शासन स्तर पर विशेष जांच समितियों का गठन किया गया.  इन समितियों ने जब संदिग्ध संस्थानों की पड़ताल शुरू की तो एक के बाद एक चौंकाने वाले तथ्य सामने आने लगे. 

दून कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी भी उन संस्थानों की फेहरिस्त में शामिल था जिन पर संदेह की सुई टिकी हुई थी. जांच टीम ने कॉलेज से जुड़े केवाईसी रिकॉर्ड, छात्रवृत्ति लाभार्थियों की सूची और तमाम दस्तावेजों को खंगाला. इसके बाद  जो तस्वीर उभरकर आई, वह कॉलेज प्रबंधन के लिए मुश्किलें खड़ी करने वाली थी. 

क्या है पूरा आरोप

आरोप है कि कॉलेज प्रबंधन ने ऐसे छात्रों के नाम पर छात्रवृत्ति की राशि हासिल की जो या तो कॉलेज में पढ़ते ही नहीं थे, या फिर जिनके दस्तावेज पूरी तरह फर्जी थे. इसका मतलब साफ था कि जिन बच्चों की पढ़ाई के नाम पर सरकार ने पैसा दिया था, उनमें से कई का कॉलेज से कोई वास्ता ही नहीं था. जांच रिपोर्ट के आधार पर जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने थाने का दरवाजा खटखटाया और प्रेमनगर पुलिस ने कॉलेज प्रबंधन के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है. 

पुलिस ने मामला दर्ज क शुरू की कार्रवाई

पुलिस ने कॉलेज प्रबंधन के विरुद्ध भारतीय दंड संहिता की धारा 409 (आपराधिक विश्वासघात), 420 (धोखाधड़ी), 467 (दस्तावेजों की जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी) और 471 (जाली दस्तावेज को असली बताकर उपयोग करना) के तहत मामला दर्ज किया है. 

प्रेमनगर थाना पुलिस के अनुसार, इस मामले से जुड़े सभी दस्तावेजों, भुगतान रिकॉर्ड और सत्यापन प्रक्रिया की बारीकी से जांच की जाएगी. जांच में जो भी नाम या तथ्य सामने आएंगे, उसके तहत ही आगे की कार्रवाई तय होगी. फिलहाल पूरे घटनाक्रम में कॉलेज प्रबंधन से जुड़े किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं हुई है. हालांकि, जांच का दायरा बढ़ने के साथ कभी भी बड़ी कार्रवाई हो सकती है.