मेरठ के व्यापारियों को बड़ा झटका, SC ने सेंट्रल मार्केट के 44 भवनों पर कार्रवाई बरकरार रखी
Meerut News In Hindi: फैसले के बाद सेंट्रल मार्केट में मायूसी का माहौल देखने को मिला. पिछले करीब तीन महीने से धरने पर बैठी महिलाएं फैसले की जानकारी मिलते ही फूट-फूटकर रो पड़ीं.

उत्तर प्रदेश में मेरठ के चर्चित सेंट्रल मार्केट मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने 44 भवन स्वामियों और व्यापारियों की उम्मीदों को बड़ा झटका दिया है. सर्वोच्च न्यायालय ने 44 सील किए गए भवनों को ध्वस्त करने के आदेश को बरकरार रखते हुए भवन स्वामियों को 15 दिन के भीतर स्वयं अवैध निर्माण हटाने के निर्देश दिए हैं.
फैसले के बाद सेंट्रल मार्केट में मायूसी का माहौल देखने को मिला. पिछले करीब तीन महीने से धरने पर बैठी महिलाएं फैसले की जानकारी मिलते ही फूट-फूटकर रो पड़ीं. आज महिलाओं और व्यापारियों ने अपनी घर और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को बचाने के लिए सुंदरकांड का पाठ भी किया था. बड़ी संख्या में व्यापारी और उनके परिवार बाजार पहुंचे, जहां कई लोगों की आंखें नम थीं.
रोजी-रोटी पर संकट
व्यापारियों का कहना है कि इस फैसले से हजारों लोगों की रोज़ी-रोटी और भविष्य पर संकट खड़ा हो गया है. अब सभी की नजरें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं. दरअसल, सेंट्रल मार्केट का विवाद केवल आवासीय भूखंडों के व्यावसायिक उपयोग तक सीमित नहीं है. आरोप है कि कई भवनों में स्वीकृत मानचित्र से अधिक निर्माण किया गया और सेटबैक यानी भवन के चारों ओर छोड़ी जाने वाली अनिवार्य खुली जगह का भी उल्लंघन किया गया.
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यही नहीं जिन भूखंडों का आवंटन मूल रूप से आवासीय उपयोग के लिए हुआ था, समय के साथ वहां दुकानें, शोरूम, रेस्तरां, बैंक, क्लीनिक और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित होने लगे. इसके अलावा कई भवनों में नियमों के विपरीत अतिरिक्त निर्माण और सेटबैक क्षेत्र पर अतिक्रमण के आरोप लगे.
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश बरकरार रखा
आवास विकास परिषद ने इसे मास्टर प्लान और भवन निर्माण नियमों का उल्लंघन मानते हुए कार्रवाई शुरू की. मामला अदालत पहुंचा और अब सुप्रीम कोर्ट ने 44 सील किए गए भवनों के संबंध में ध्वस्तीकरण के आदेश को बरकरार रखा है. ऐसे में आने वाले दिनों में मेरठ के सेंट्रल मार्केट में प्रशासनिक कार्रवाई तेज होने की संभावना है.
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