अखिल भारतीय मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने लखनऊ के मलिहाबाद स्थित किले को लेकर उठे विवाद पर सख्त बयान दिया है. उन्होंने पासी समाज के दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए उसे भ्रामक, गलत और इतिहास के विरुद्ध बताया है.

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मौलाना रज़वी ने कहा कि मलिहाबाद का किला पासी राजा का नहीं है, बल्कि अवध के नवाबों में से एक नवाब का किला है. उन्होंने स्पष्ट किया कि किले के बगल में जो कब्रिस्तान है, वह मलिहाबाद की एक बड़ी पढ़ी-लिखी परिवार की निजी कब्रिस्तान है. मस्जिद भी निजी तौर पर नवाब द्वारा बनवाई गई थी. 

क्या है पासी समाज का दावा? 

मलिहाबाद के कसमंडी क्षेत्र में स्थित एक पुराने ढांचे को लेकर पासी समाज का दावा है कि यह स्थल महाराजा कंस पासी का ऐतिहासिक किला और शिव मंदिर था. समाज का आरोप है कि इस प्राचीन हिंदू धरोहर को अवैध रूप से दरगाह और मस्जिद में तब्दील कर दिया गया है. मौलाना शहाबुद्दीन रज़वी बरेलवी ने कहा- पासी समाज का यह दावा सरासर भ्रामक, गलत और इतिहास के विरुद्ध है. उन्होंने चेतावनी दी कि वर्तमान में एक ट्रेंड चल पड़ा है, जिसमें हर व्यक्ति किसी न किसी मुद्दे को लेकर विवाद खड़ा करना चाहता है और हिंदू-मुस्लिम नफरत फैलाने की कोशिश करता है.

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उन्होंने जनता से अपील की कि ऐसी फिरकापरस्त ताकतों को पहचानें और उनके चेहरों पर पड़ी नकाब को नोचें, ताकि वे बेनकाब हो जाएं. मौलाना ने कहा कि ये वही लोग हैं जो हिंदू-मुस्लिम भाईचारे को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं. उन्होंने सभी समुदायों से अपील की कि वे इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने की बजाय सच्चे ऐतिहासिक तथ्यों का सम्मान करें और शांति बनाए रखें. विवाद खड़े करके समाज को बांटने वाले तत्वों से समाज को सावधान रहना चाहिए.

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