कथावाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के एक बयान को लेकर इन दिनों चर्चा तेज हो गई है. उन्होंने कहा था कि बच्चे तो 4 पैदा करो, पर एक आरएसएस को दो. इस बयान के सामने आने के बाद अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं.

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इस पूरे मुद्दे पर मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए साफ कहा, “किसी व्यक्ति के कितने बच्चे होंगे, यह उसका निजी मामला है. हमें नहीं लगता कि इस पर किसी को सलाह देने या कोई निर्देश जारी करने की आवश्यकता है.”

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उन्होंने कहा कि हर माता-पिता अपने बच्चों के भविष्य को लेकर खुद निर्णय लेते हैं. वे तय करते हैं कि बच्चों को किस दिशा में आगे बढ़ाना है और कौन-सा पेशा चुनना है. यह पूरी तरह उनका व्यक्तिगत अधिकार होता है, जिसमें बाहरी दखल या सलाह की कोई जरूरत नहीं होती.

जनसंख्या और समाज पर चिंता

मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने इस मुद्दे को सिर्फ व्यक्तिगत स्वतंत्रता तक सीमित नहीं रखा, बल्कि देश में जनसंख्या के बढ़ते दबाव की ओर भी ध्यान दिलाया. उन्होंने कहा, "इसलिए इस मामले में लोगों को कोई भी सलाह देने की जरूरत नहीं है. पहले से ही देश की जनसंख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है, और इस तरह के बयानों से कहीं न कहीं और अधिक भ्रम पैदा होता है."

बयान से बढ़ी बहस

कथावाचक धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के इस बयान के बाद समाज और राजनीति दोनों ही स्तरों पर बहस छिड़ गई है. कुछ लोग इसे धार्मिक और वैचारिक नजरिए से देख रहे हैं, तो वहीं कई लोग इसे व्यक्तिगत जीवन में हस्तक्षेप मान रहे हैं.

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फिलहाल, यह मुद्दा लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां एक ओर व्यक्तिगत आजादी की बात हो रही है, वहीं दूसरी ओर ऐसे बयानों के समाज पर पड़ने वाले असर पर भी सवाल उठ रहे हैं.