मथुरा में गोवर्धन के नजदीक स्थित चित्रगुप्त पीठ पर रविवार (9 अगस्त) सुबह से ही संतों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया. यहां संतों की एक सभा आयोजित की गई, जिसमें श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े मुद्दे पर संतों ने अपने विचार रखे. सभा के दौरान दोपहर करीब 12 बजे श्रीकृष्ण जन्मस्थान के लिए होने वाली कार सेवा के दूसरे चरण की घोषणा की गई.

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चित्रगुप्त पीठ के पीठाधीश्वर डॉ. सच्चिदानंद महाराज ने सभा के दौरान कार सेवा की घोषणा की. उन्होंने कहा कि जिस दिन अयोध्या में रामलला की मुक्ति के लिए कार सेवा हुई थी, उसी दिन यानी 6 दिसंबर को मथुरा में श्रीकृष्ण लला के मंदिर के लिए अगली कार सेवा की जाएगी. इस ऐलान के बाद श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े आंदोलन को लेकर संतों ने आगे की रणनीति भी स्पष्ट की.

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संतों ने सरकार के सामने रखीं कई मांगें

सभा में संतों ने शासन से कई मांगें भी रखीं. इनमें सबसे प्रमुख मांग पूजा स्थल अधिनियम, 1991 को समाप्त करने की रही. संतों ने कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति से जुड़े मामले की नियमित सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में होनी चाहिए, ताकि मामले का जल्द निपटारा हो सके.

संतों ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि परिसर में भगवान श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री का भोग लगाने की अनुमति देने की भी मांग की. उनका कहना है कि श्रद्धालुओं को अपने आराध्य भगवान को भोग अर्पित करने का अवसर मिलना चाहिए.

पुरातत्व सर्वेक्षण पर लगी रोक हटाने की मांग

इसके अलावा संतों ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद परिसर के पुरातत्व सर्वेक्षण पर लगी रोक हटाने की मांग भी उठाई. संतों का कहना है कि इस मामले से जुड़े तथ्यों की जांच के लिए पुरातत्व सर्वेक्षण जरूरी है.

सभा में डॉ. सच्चिदानंद महाराज के अलावा प्रयागराज से पहुंचे श्री श्री 10008 संतोषानंद महा मंडलेश्वर और श्री श्री 10008 ब्रह्म ऋषि चंद्र देव जी महाराज समेत कई संत मौजूद रहे.

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