माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के अनशन से बड़ी खबर सामने आ रही है. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ बयानबाजी के चलते ममता कुलकर्णी पर गाज गिर गई है. किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी प्रो डॉ लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने उनके खिलाफ कार्रवाई की.
उन्होंने यामाई ममता नंद गिरी उर्फ ममता कुलकर्णी को किन्नर अखाड़े से निष्कासित कर दिया है. महाकुंभ 2025 में 24 जनवरी को ममता कुलकर्णी को किन्नर अखाड़े ने नया नाम देकर महामंडलेश्वर बनाया था.
बयानों से अखाड़े की आचार्य ने खुद को किया अलग
आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी प्रोफेसर डॉक्टर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने ममता कुलकर्णी के बयानों से खुद को अलग कर लिया है. उन्होंने कहा है कि शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को लेकर जो बयान ममता कुलकर्णी ने दिया है वह उनका व्यक्तिगत बयान है.
इस मुद्दे पर उन्होंने किन्नर अखाड़े से कोई विचार विमर्श नहीं किया है. उन्होंने कहा है कि हमारे गुरु पंचदशनाम जूना अखाड़े के संरक्षक और अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री महंत हरि गिरी महाराज हैं. हमने दीक्षा शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती से ली है.
क्या बोलीं आचार्य महामंडलेश्वर?
आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी प्रोफेसर डॉक्टर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने कहा है कि हमारे गुरु स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती और ब्रह्मलीन स्वामी स्वरुपानंद सरस्वती के बीच कोर्ट में विवाद भी चल रहा था. उन्होंने कहा है कि लेकिन उन बातों पर हमें कोई टिप्पणी नहीं करनी है.
उन्होंने कहा कि किन्नर अखाड़ा इन सभी विवादों से पूरी तरह से दूर है.उन्होंने कहा है कि न मैं शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को सही कह रही हूं और ना गलत कह रही हूं, लेकिन चिंता की बात यह है कि प्रशासन को जिस तरह से हैंडल करना चाहिए था उस तरह से नहीं किया गया.
'सनातन की खिल्ली नहीं उड़नी चाहिए थी'
उन्होंने आगे कहा है कि सनातन की खिल्ली नहीं उड़नी चाहिए थी. हालांकि इस बात का दुख है कि बटुक ब्राह्मणों की शिखा पड़कर खींचा गया और मारा पीटा गया. आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने कहा कि बटुकों के साथ जो कुछ हुआ इस पर हमें भी नाराजगी है.
लेकिन कोई अगर किसी परंपरा पर उंगली उठाए तो हमें दुख होता है. इसलिए किन्नर अखाड़े ने यामाई ममता नंद गिरी उर्फ ममता कुलकर्णी से दूरी बना ली है. अब वह किन्नर अखाड़े की सदस्य भी नहीं है.
किन्नर अखाड़े ने लिया फैसला
किन्नर अखाड़े ने यह निर्णय लिया है कि कई बार कई विषयों पर टिप्पणी करके उन्होंने असहज स्थिति उत्पन्न की. उन्होंने कहा है कि किन्नर अखाड़ा किसी तरह का विवाद नहीं चाहता है. आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी प्रोफेसर डॉक्टर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने कहा है कि हमारे अखाड़े में किन्नर, महिला और पुरुष सब शामिल हैं
हम चाहते हैं कि सब मिलकर चलें और विवादों में न पड़ें. उन्होंने कहा है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जो अपने आप को शंकराचार्य कहते हैं वह अपना काम जानें.उनके खिलाफ किन्नर अखाड़े की ओर से किसी तरफ की कोई टिप्पणी नहीं की गई है.
दो दिन पहले ममता कुलकर्णी ने दिया था बयान
उन्होंने कहा है कि किन्नर अखाड़े से कोई टिप्पणी नहीं की गई है और इसी वजह से ममता कुलकर्णी से किन्नर अखाड़े ने दूरी बना ली है.2 दिन पूर्व ही ममता कुलकर्णी ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को लेकर बयान दिया था.
उन्होंने कहा था कानून सबके लिए समान है चाहे वह राजा हो या रंक, गुरु हो या शिष्य केवल चार वेद कंठस्थ कर लेने से कोई शंकराचार्य नहीं बन जाता है, उनमें काफी अहंकार है और आत्मज्ञान शून्य है।