उत्तर प्रदेश के महोबा जनपद से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां बेटी के हाथ पीले होने से पहले ही मां  की अर्थी उठ गई. कबरई थाना क्षेत्र के मकरबई गांव में शादी की तैयारियों के बीच अचानक मातम पसर गया. एक मां, जो अपनी लाडली की शादी का पहला निमंत्रण कार्ड भगवान के चरणों में अर्पित करने जा रही थी, मगर ट्रेन की चपेट में आकर काल के गाल में समा गई.

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इस दुर्घटना के बाद परिवार में चीख-पुकार मच गयी, किसी को यकीन नहीं हो रहा कि जिस घर में खुशियों के गीत बज रहे थे, वहां अब मातम पसर चुका है. फिलहाल पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज जांच शुरू कर दी है.

बेटी की शादी में जुटीं थीं ऊषा सिंह  

जानकारी के मुताबिक, मकरबई गांव की निवासी 42 वर्षीय ऊषा सिंह पत्नी धीरेंद्र सिंह, इन दिनों अपनी 21 वर्षीय पुत्री सपना की शादी की तैयारियों में जुटी थीं. सपना का विवाह आगामी 28 अप्रैल को होना तय था. घर में उत्साह का माहौल था और शादी के कार्ड छपकर आ चुके थे. हिंदू परंपरा के अनुसार शुभ कार्य का पहला निमंत्रण भगवान को दिया जाता है.

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बेटे के साथ कार्ड चढ़ाने जा रहीं थीं

इसी आस्था के साथ ऊषा सिंह अपने 15 वर्षीय छोटे पुत्र नागेंद्र के साथ बाइक पर सवार होकर मध्य प्रदेश के ओरछा स्थित रामराजा सरकार के दरबार में पहला कार्ड चढ़ाने के लिए निकली थीं. हादसे की मुख्य वजह गांव के रेलवे अंडरब्रिज की बदहाली बनी है. परिजनों और ग्रामीणों के अनुसार मकरबई गांव का रेलवे अंडरब्रिज बेहद खराब स्थिति में है. वहां से ट्रकों की भारी आवाजाही और ऊबड़ खाबड़ रास्ता केकारण बाइक पर दो लोगों का निकलना असंभव था. इसी कारण ऊषा सिंह ने अपने पुत्र नागेंद्र से बाइक अकेले निकालने को कहा और खुद पैदल ही रेलवे ट्रैक पार करके दूसरी ओर जाने लगीं.

दुर्भाग्यवश जैसे ही वह ट्रैक पार कर रही थीं, तभी वहां से तेज रफ्तार झांसी-बांदा मेमू ट्रेन गुजरी. ट्रेन की चपेट में आने से ऊषा सिंह की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई. मृतका के देवर पिंटू सिंह और ग्रामीण सुरेंद्रपाल सिंह ने बताया कि गांव के खराब रास्तों और अंडरब्रिज की दुर्दशा के कारण आए दिन हादसे होते हैं. मृतका अपने पीछे दो पुत्र 18 वर्षीय मानवेंद्र और 15 वर्षीय नागेंद्र सहित पुत्री सपना को रोता-बिलखता छोड़ गई हैं.