आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के 'टर्म्स ऑफ रेफरेंस' (ToR) से पेंशनरों और पारिवारिक पेंशनरों को बाहर रखे जाने के केंद्र सरकार के फैसले ने देशभर के सेवानिवृत्त कर्मचारियों में भारी आक्रोश भर दिया है. इसी कड़ी में, ऑल इंडिया स्टेट पेंशनर्स फेडरेशन के आह्वान पर महोबा के अम्बेडकर पार्क में सैकड़ों पेंशनरों ने एकजुट होकर काली पट्टी बांधी और 'काला दिवस' मनाते हुए जोरदार विरोध प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी के प्रतिनिधि (उपजिलाधिकारी) को सौंपकर अपने अधिकारों की आवाज बुलंद की.

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अम्बेडकर पार्क में आयोजित इस धरने में सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई. वरिष्ठ नागरिक पेंशनर्स सेवा संस्थान के महामंत्री बी.के. तिवारी ने सरकार के फैसले पर कड़ा प्रहार किया. उन्होंने कहा कि जिन कर्मचारियों ने अपने जीवन के तीन दशक से अधिक राष्ट्र सेवा में समर्पित कर दिए, उन्हें वेतन आयोग के दायरे से बाहर रखना न केवल निराशाजनक है, बल्कि दुर्भाग्यपूर्ण भी है. उन्होंने स्पष्ट किया कि पेंशन में संशोधन उनका संवैधानिक अधिकार है और इससे वंचित करना सरासर नाइंसाफी है.

पेंशनरों ने रखीं 6 सूत्रीय प्रमुख मांगें

संगठन के अध्यक्ष सुनील शर्मा ने सरकार के समक्ष पेंशनरों की कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

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  • 1 जनवरी 2026 से पहले सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों की पेंशन में भी अनिवार्य रूप से संशोधन किया जाए.
  • पेंशन की कम्यूटेड वैल्यू (Commuted Value) को 11 साल बाद बहाल किया जाए.
  • हर पांच वर्ष में पेंशन में 5 प्रतिशत वृद्धि की सिफारिशों पर गंभीरता से विचार हो.
  • कोरोना काल के दौरान रोके गए बकाया महंगाई भत्ते (DR) का तत्काल भुगतान किया जाए.
  • सभी सेवानिवृत्त कर्मचारियों को निशुल्क 'कैशलेस चिकित्सा सुविधा' प्रदान की जाए.
  • सेवानिवृत्ति की तिथि के आधार पर पेंशनरों के बीच किया जाने वाला भेदभाव तुरंत समाप्त हो.

'पेंशनर नाराज हुआ तो बदल देगा सरकार की दिशा'

प्रदर्शन के दौरान पेंशनरों ने सरकार को कड़े शब्दों में चेतावनी भी दी. सुनील शर्मा ने सरकार को आगाह करते हुए कहा कि देश और प्रदेश का पेंशनर वर्ग अब अपने हकों के लिए जागरूक है. यदि पेंशनरों को नाराज किया गया, तो आने वाले समय में वे अपनी एकजुटता से सरकार की दिशा और दशा दोनों बदलने की ताकत रखते हैं.