महोबा जिले के महुआ गांव में फसल बर्बादी और कर्ज से परेशान 70 वर्षीय किसान ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. किसान गौरीशंकर अहिरवार के पास करीब ढाई बीघा जमीन थी और उन्होंने लगभग 12 बीघा जमीन बलकट पर लेकर खेती की थी. अतिवृष्टि से फसल बर्बाद होने के बाद उन पर बैंक और साहूकारों का करीब ढाई लाख रुपये कर्ज बताया जा रहा है.

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महोबा के पनवाड़ी थाना क्षेत्र के महुआ गांव में फसल बर्बादी और कर्ज से परेशान 70 वर्षीय किसान गौरीशंकर अहिरवार ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. किसान की मौत के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है. परिजनों के मुताबिक गौरीशंकर के पास करीब ढाई बीघा जमीन थी, जबकि उन्होंने लगभग 12 बीघा जमीन बलकट पर लेकर खेती की थी. इस वर्ष अतिवृष्टि के चलते उनकी फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई.

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परिवार ने क्या कहा?

परिवार का कहना है कि खेती में काफी पैसा लगाने के बावजूद फसल से कोई आमदनी नहीं हुई. किसान ने बैंक से करीब 40 हजार रुपये का कर्ज लिया था, जबकि गांव के साहूकारों से लगभग दो लाख रुपये उधार बताया जा रहा है.

परिजन रघुवीर राजपूत ने बताया कि गौरीशंकर पिछले करीब आठ दिनों से लगातार परेशान रहते थे और कर्ज चुकाने को लेकर परिवार के सामने चिंता जाहिर करते थे. सोमवार देर रात वह गांव में गणेश प्रतिमा के पंडाल में मौजूद रहे और बाद में घर लौट आए. रात में उन्होंने मकान के दरवाजे के कुंदे से फांसी लगा ली.

मौके पर पहुंची पुलिस

मंगलवार (22 सितंबर) की सुबह जब परिजनों ने दरवाजा खोला तो किसान को फंदे पर लटका देखा. सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भरने के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया.

मृतक के भाई रतनलाल ने बताया कि फसल में पैसा लगाने के बावजूद उत्पादन नहीं हुआ, जिससे गौरीशंकर काफी तनाव में थे. परिजनों ने किसान की आत्महत्या की वजह फसल नुकसान और कर्ज को बताया है. पुलिस का कहना है कि आत्महत्या के पीछे की वास्तविक वजह की जांच की जा रही है. परिवार ने सरकार से आर्थिक मदद और कर्ज माफी की मांग की है.

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