उत्तर प्रदेश के महोबा से एक रूह कंपा देने वाली खबर सामने आई है, जहां बीएससी की एक छात्रा ने छेड़खानी और प्रताड़ना से तंग आकर मौत को गले लगा लिया. सुसाइड से पहले छात्रा ने एक वीडियो बनाकर आरोपी को भेजा और अपनी दर्दनाक दास्तां सुनाई. 4 साल से युवक की प्रताड़न और उसकी हरकतों के आगे आखिर एक बेटी हार गई. पुलिस अब इस वायरल वीडियो और परिजनों की तहरीर के आधार पर मामले की जांच में जुटी है. 

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खरेला थाना क्षेत्र का चंदौली गांव आज मातम में डूबा हुआ है. एक हंसती-खेलती 21 साल की बेटी प्रिया, जो बीएससी फाइनल ईयर की छात्रा थी और सुनहरे भविष्य के सपने देख रही थी, उसने एक खौफनाक कदम उठा लिया. लेकिन यह सिर्फ आत्महत्या नहीं, बल्कि उस सिस्टम और समाज पर सवाल है जो एक बेटी को सुरक्षित महसूस नहीं करा सका.

प्रिय का वीडियो हुआ वायरल

मरने से पहले प्रिया ने जो वीडियो बनाया, वह आज सोशल मीडिया पर वायरल है. जहरीला पदार्थ खाते हुए उसने अपनी मौत का मंजर खुद रिकॉर्ड किया और आरोपी रामनरेश को भेज दिया. प्रिया ने व्हाट्सएप पर इसे मैसेज भेजा और आखिरी लाइनों में लिखा ‘तुम चाहते थे न कि मैं मर जाऊं, अब तुम्हारे मन का हो जाएगा... अब तुम आजाद हो.’

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चार सालों से प्रताड़ित कर रहा था

मृतक प्रिया के परिजनों का आरोप है कि जरौली गांव का रहने वाला रामनरेश उसे लंबे समय से परेशान कर रहा था. यह प्रताड़ना आज की नहीं है. 4 साल पहले भी परिजनों ने इसकी शिकायत की थी, लेकिन तब मामला शांत करा दिया गया. मगर आरोपी के हौसले पस्त नहीं हुए. वह लगातार प्रिया को मानसिक रूप से प्रताड़ित करता रहा. प्रिया ने जान देने से पहले उसे दो बार आरोपी को वॉइस कॉल भी किया, लेकिन जब कोई जवाब नहीं मिला, तो उसने मौत का रास्ता चुन लिया. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया.

अपर पुलिस अधीक्षक वंदना सिंह ने बताया कि पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. पुलिस अब उस मोबाइल नंबर और वायरल वीडियो की बारीकी से जांच कर रही है. परिजनों ने आरोपी रामनरेश के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है.

प्रिया की मौत पर उठ रहे सवाल

प्रिया की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. आखिर 4 साल पहले हुई शिकायत पर कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्यों एक मनचले के डर से एक होनहार छात्रा को अपनी जान देनी पड़ी? प्रिया तो चली गई, लेकिन उसका वो आखिरी वीडियो उन तमाम बेटियों की चीख है जो आज भी ऐसी प्रताड़ना सहने को मजबूर हैं. अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में न्याय कब तक सुनिश्चित करता है.