महोबा में आज आंगनबाड़ी संयुक्त मोर्चा के बैनर तले सैकड़ों कार्यकत्रियों और सहायिकाओं ने कलेक्ट्रेट में जमा हुईं. मानदेय वृद्धि और नियमितीकरण की मांग को लेकर महिलाओं ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि मात्र 6 हजार रुपये में परिवार का गुजारा मुमकिन नहीं है, इसलिए अब आर-पार की लड़ाई का वक्त आ गया है.

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जानकारी के मुताबिक, आंगनबाड़ी संयुक्त मोर्चा उत्तर प्रदेश के आह्वान पर जिले भर की आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां और सहायिकाएं अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतर आईं. हाथों में तख्तियां लिए इन महिलाओं के तेवर बता रहे हैं कि अब वे कोरे आश्वासनों से मानने वाली नहीं हैं. प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने जोश भर देने वाले नारे लगाए. फूल नहीं चिंगारी हैं, हम भारत की नारी हैं और 6000 में दम नहीं, 24000 से कम नहीं जैसे नारों के साथ उन्होंने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी.

'वर्षों से की जा रही मांगों की अपेक्षा'

प्रदर्शन कर रही महिलाओं का कहना है कि सरकार पिछले कई वर्षों से उनकी मांगों की उपेक्षा कर रही है. आज के महंगाई के दौर में महज 6 हजार रुपये के मानदेय पर परिवार का भरण-पोषण करना एक बड़ी चुनौती बन गया है. आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की मांग है कि उन्हें परमानेंट यानी नियमित किया जाए और मानदेय को संशोधित कर कम से कम 24 हजार रुपये किया जाए.

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'हड़ताल का शौक नहीं, मजबूरी'

जिलाध्यक्ष आसमीन खातून ने सरकार को ललकारते हुए कहा कि यह हड़ताल कोई शौक नहीं, बल्कि उनकी मजबूरी है. उन्होंने आगामी 8 मार्च का जिक्र करते हुए कहा कि उस दिन लखनऊ की सरजमीं गुलाबी रंग में रंग जाएगी, क्योंकि प्रदेश भर की आंगनबाड़ी महिलाएं वहां डेरा डालेंगी.

'2027 के चुनाव में सरकार को भुगतना पड़ेगा खामियाजा'

विरोध प्रदर्शन का यह स्वर अब राजनीतिक मोड़ भी ले रहा है. महिलाओं ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि सरकार ने उनकी जायज मांगों को समय रहते पूरा नहीं किया, तो इसका खामियाजा उसे 2027 के विधानसभा चुनाव में भुगतना पड़ेगा. आंगनबाड़ी एकता जिंदाबाद के नारों के साथ इन महिलाओं ने साफ कर दिया है कि उनके मान सम्मान और अधिकार की यह लड़ाई अब अंजाम तक पहुँचने तक जारी रहेगी.