उत्तर प्रदेश के महोबा में आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने अपनी 8 सूत्रीय मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट में जोरदार प्रदर्शन किया. आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री के नाम अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा है. अल्प मानदेय, डिजिटल शोषण और सरकारी दर्जे की मांग को लेकर महिलाएं अब आर-पार की जंग के मूड में हैं. यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो आंदोलन और आमरण अनशन की चेतावनी भी दी गई है.

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जानकारी के मुताबिक, महोबा की आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने आज अपनी आवाज बुलंद की. जिलाध्यक्ष आसमीन खातून के नेतृत्व में भारी संख्या में कर्मचारी और सहायिकाएं कलेक्ट्रेट में जमा हुईं और प्रधानमंत्री के नाम 8 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा है. प्रदर्शनकारी महिलाओं ने कहा है कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वह आंदोलन और आमरण अनशन करेंगी.

इन महिलाओं का आरोप है कि उन्हें केवल स्वयंसेवी माना जा रहा है, जबकि वे सरकार की प्रत्यक्ष कर्मचारी हैं. वर्तमान में कार्यकर्ताओं को मात्र 4,500 रुपये और सहायिकाओं को 2,250 रुपये मासिक दिए जाते हैं, जो महंगाई और उनके मेहनत के हिसाब से बेहद कम हैं.

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आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं ने की ये मांग

कार्यकर्ताओं ने न्यूनतम वेतन 24,000 रुपये, सरकारी दर्जा, पेंशन और ग्रेच्युटी की मांग की है. साथ ही, तकनीक के नाम पर होने वाले मानसिक शोषण का मुद्दा भी उठाया गया है. उन्होंने ‘फेस रिकॉग्निशन’ प्रणाली बंद करने और पोषण ट्रैकर में उपयोग के लिए 5G मोबाइल सेट तथा सालाना 5,000 रुपये रिचार्ज की मांग की है. इसके अलावा, सेवानिवृत्ति पर 5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता और लाभार्थियों के पोषण आहार में तीन गुना वृद्धि भी प्रमुख मांगों में शामिल है. 

'बंधुआ मजदूरों जैसी स्थिति में नहीं करेंगी काम'

कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे अब बंधुआ मजदूरों जैसी स्थिति में काम नहीं करेंगी. यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे आमरण अनशन और बड़े आंदोलन की चेतावनी दे रही हैं. बच्चों के भविष्य की खातिर मेहनत करने वाली इन महिलाओं का संघर्ष अब प्रशासन और केंद्र सरकार के सामने बड़ी चुनौती बन गया है.