प्रयागराज में 3 जनवरी से शुरू होने जा रहे माघ मेले से पहले ही अव्यवस्थाओं के संकेत मिलने लगे हैं. मेले में जमीन आवंटन और बुनियादी सुविधाओं को लेकर साधु-संतों और विभिन्न धार्मिक संस्थाओं में गहरी नाराजगी देखने को मिल रही है. आरोप है कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद अब तक न तो पर्याप्त जमीन दी गई है और न ही सुविधा पर्चियों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो पाई है.

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जमीन और सुविधाओं की मांग को लेकर साधु-संतों और संस्था प्रमुखों ने प्रयागराज मेला प्राधिकरण कार्यालय को आंदोलन का केंद्र बना लिया है. आए दिन कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन और नारेबाजी हो रही है. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि माघ मेले जैसे बड़े धार्मिक आयोजन में उनके साथ उपेक्षा की जा रही है, जिससे आक्रोश लगातार बढ़ रहा है.

सभागार गेट पर SDM से तीखी बहस

शनिवार को हालात उस समय और तनावपूर्ण हो गए जब मेला प्राधिकरण सभागार के गेट पर बैठे प्रदर्शनकारियों से एसडीएम संजीव उपाध्याय की तीखी नोकझोंक हो गई. जमीन और सुविधाओं को लेकर दोनों पक्षों में बहस इतनी बढ़ गई कि मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया.

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SDM के पैरों में गिरा संत, भावुक दृश्य

बहस के दौरान एक संत अचानक जमीन और सुविधाओं की मांग को लेकर एसडीएम के पैरों में गिर पड़ा और गिड़गिड़ाने लगा. यह दृश्य वहां मौजूद लोगों को झकझोर देने वाला था. संत की यह मजबूरी भरी अपील पूरे घटनाक्रम का सबसे संवेदनशील पहलू बन गई.

मौके पर मौजूद लोगों ने बनाया वीडियो

जिस समय यह पूरा हंगामा चल रहा था, वहां बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे. कई लोगों ने बहस और संत के पैरों में गिरने की घटना को अपने मोबाइल कैमरों में रिकॉर्ड कर लिया. देखते ही देखते यह वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया जाने लगा. करीब 16 सेकंड का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया है. लोग प्रशासन की कार्यशैली और मेला प्रबंधन को लेकर सवाल उठा रहे हैं. वीडियो को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं.

अखिलेश यादव ने भी एक्स पर उठाए सवाल

इस वायरल वीडियो को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा किया है. उन्होंने मेला प्राधिकरण के अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.

चर्चा में बना मामला, प्रशासन पर बढ़ा दबाव

फिलहाल यह वीडियो आम लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. माघ मेले से पहले सामने आई यह तस्वीर प्रशासन के लिए चुनौती बनती नजर आ रही है और अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि मेला प्राधिकरण इस नाराजगी को कैसे शांत करता है.