उत्तर प्रदेश में एसआईआर की प्रक्रिया में सबसे ज्यादा 2.89 करोड़ वोटरों का नाम ड्राफ्ट से बाहर हो गया है. इनमें सबसे ज्यादा क़रीब 12 लाख वोटर राजधानी लखनऊ में कम हुए हैं. 6 फरवरी तक वोटर लिस्ट में दावेदारी की प्रक्रिया चल रही है. लखनऊ में अब तक 1.20 लाख नए वोटरों ने अपना नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए फॉर्म छह भर दिया है.
लखनऊ में एसआईआर प्रक्रिया में ग्रामीण इलाकों से ज्यादा शहरी इलाकों में वोटर कम हुए है. शहरी इलाकों में 30-40 फ़ीसद तक मतदाता कम हुए. इनमें सबसे ज्यादा लखनऊ नॉर्थ में वोटरों के नाम ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर हुए हैं. नॉर्थ में करीब 1.91 लाख वोटर बाहर हुए.
एसआईआर में कहां कितने वोट कटे
इसी तरह सरोजिनीनगर में 1.89 लाख, लखनऊ पूर्व सीट पर 1.70 लाख, कैंट सीट पर 1.42 लाख, पश्चिमी सीट पर 1.42 लाख, मध्य सीट पर 1.28 लाख, बीकेटी सीट पर 1.10 लाख, मलीहाबाद सीट पर 64 हजार और मोहनलालगंज सीट पर 60 हजार वोट कम हुए.
चुनाव आयोग के मुताबिक़ जिन भी वोटरों के नाम एसआईआर की प्रक्रिया में हट गया है वो 6 फरवरी तक दावेदारी कर सकते हैं और चुनाव आयोग में अपने दस्तावेज जमा कर वोटर लिस्ट में अपना नाम शामिल करा सकते हैं. इन दावों और आपत्तियों को निस्तारण किया जाएगा. दावेदार ऑनलाइन और ऑफ़लाइन दोनों तरह से अपने आवेदन कर सकते हैं.
लखनऊ में इतने नए वोटरों ने भरा फॉर्म
एसआईआर का ड्राफ्ट जारी होने के बाद फॉर्म-6 भरने की प्रक्रिया जारी है. अभी तक लखनऊ में 1.20 लाख वोटरों ने अपने नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए आवेदन किया है. इनमें से लखनऊ वेस्ट में अब तक 35 हज़ार से ज्यादा लोगों ने आवेदन किया है. वहीं दूसरे नंबर पर नॉर्थ क्षेत्र विधानसभा हैं जहां अब तक 21 हजार लोगों ने फॉर्म छह भरा है.
इसके अलावा सरोजिनी नगर सीट पर 14 हजार लोगों ने फॉर्म-6 भरा है, लखनऊ पूर्व में 11 हजार, बीकेटी में 10 हज़ार, लखनऊ मध्य में 9 हज़ार, कैंट सीट पर 7.5 हजार, मलिहाबाद में 6.5 हज़ार और मोहनलालगंज गंज में 5 हज़ार नए वोटरों ने आवेदन दिया है.
यूपी में एसआईआर प्रक्रिया को लेकर पहले तो सपा और कांग्रेस ही परेशान दिख रहे थे, लेकिन जब शहरी इलाकों में भारी संख्या में वोटरों के नाम कम हुए तो बीजेपी को भी चिंता हुआ, जिसके बाद भाजपा ने अपने पूरे संगठन और पदाधिकारियों को हटाए गए वोटरों के नाम शामिल कराने के निर्देश दिए है.
सपा के बूथ एजेंट भी पीडीए प्रहरी बनकर अपने-अपने इलाकों में छूटे हुए नामों को शामिल कराने में जुटे हुए हैं. अभी तक जो आंकड़े आएं हैं, उसके मुताबिक ग्रामीण इलाकों से ज्यादा शहरी इलाकों में आवेदन आए हैं.