देश में पेट्रोल-डीजल की किल्लत का असर अब सरकारी संस्थानों पर भी नजर आ रहा है, जी हां उत्तर प्रदेश के लखनऊ स्थित संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान ने ईंधन की आपूर्ति में किल्लत के कारण सभी विभागों को पत्र जारी कर वाहन विभाग को सहयोग और सरकारी वाहनों का उपयोग आपात स्थिति और बहुत जरूरत पर ही करने के निर्देश दिए हैं. इसके अलावा उससे पहले लिखित अनुमति के लिए भी कहा गया है.

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शुक्रवार (27 मार्च) को संस्थान के प्रभारी अधिकारी वाहन द्वारा इस संबंध में निदेशक समेत सभी विभागाध्यक्षों समेत फैकल्टी को पत्र जारी कर सूचित कर दिया गया है. पत्र में ईंधन की आपूर्ति प्रभावित होने का उल्लेख किया गया है.

पत्र के प्रमुख बिंदु

  • वाहन की मांग केवल अपरिहार्य और आपातकालीन प्रकृति के कार्यों के लिए ही की जाए, जो संस्थान की आवश्यकतानुसार बहुत जरूरी हों.
  • हर मांग के साथ कार्य का स्पष्ट औचित्य, तात्कालिकता और आवश्यक विवरण अंकित करना अनिवार्य होगा. विभागाध्यक्ष या नोडल अधिकारी द्वारा अग्रसारित करना जरूरी है.
  • नियमित, सामान्य या गैर-आपातकालीन कार्यों के लिए वाहन मांगने से यथासंभव बचें.
  • ईंधन की वर्तमान उपलब्धता को देखते हुए वाहनों का आवंटन केवल प्राथमिकता वाले अति आवश्यक कार्यों के लिए ही होगा.
  • यदि इन परिस्थितियों के कारण कोई ड्यूटी पूरी नहीं हो पाती या कार्य में विलंब/असुविधा होती है, तो इसके लिए वाहन प्रकोष्ठ उत्तरदायी नहीं होगा.

प्रदेश का प्रमुख चिकित्सा संस्थान

यहां बता दें कि SGPGI यूपी का प्रमुख चिकित्सा संस्थान है, जहां रोजाना सैकड़ों मरीजों का इलाज होता है और आपातकालीन सेवाएं 24x7 चलती हैं. ऐसे में वाहन प्रबंधन (एम्बुलेंस, अन्य वाहन) सीधे मरीजों की सेवा से जुड़ा हुआ है. हालांकि सरकार ने इस संकट के समय आपूर्ति सामान्य होने की बात कही है, लेकिन तेल की बचत को लेकर भी अब विभागों ने पहल की है. जिसके बाद कई सवाल उठ रहे हैं.

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