उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के चर्चित दोहरे हत्याकांड में 19 साल बाद बड़ा फैसला आया है. 31 मार्च 2007 को बाजारखाला के पूर्वांचल टेंट हाउस में हुई शत्रुघ्न सिंह उर्फ छोटू और उसके नौकर जितेंद्र त्रिपाठी की हत्या के मामले में गोसाईगंज विधायक अभय सिंह समेत सभी आरोपियों को लखनऊ की एमपी-एमएलए कोर्ट ने बरी कर दिया है. अभय सिंह के अलावा रविंद्र उर्फ रज्जू, अजय प्रताप सिंह उर्फ अजय सिपाही और फिरोज अहमद को भी कोर्ट ने इस मामले में बरी कर दिया है.  

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इतने लंबे समय तक चले मुकदमे में अदालत के इस फैसले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. पीड़ित पक्ष ने कोर्ट के फैसले पर निराशा जताते हुए हाईकोर्ट जाने की बात कही है. जबकि अभय सिंह ने कोर्ट के फैसले पर संतोष जताया है.

क्या था पूरा मामला ?

यहां बता दें कि बाजारखाला में साल 2007 में 31 मार्च को पूर्वांचल टेंट हाउस में दो युवकों की निर्मम हत्या ने पूरे शहर को हिलाकर रख दिया था. मृतकों में शत्रुघ्न सिंह उर्फ छोटू और उनका नौकर जितेंद्र त्रिपाठी शामिल थे. इस दोहरे हत्याकांड में गोसाईगंज विधायक अभय सिंह, रविंद्र उर्फ रज्जू, अजय प्रताप सिंह उर्फ अजय सिपाही और फिरोज अहमद समेत अन्य आरोपियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ था.

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19 साल तक चली अदालत की कार्यवाही

अदालत में 19 साल तक चली कानूनी लड़ाई के बाद लखनऊ की MP-MLA विशेष अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया. कोर्ट ने इस मामले में पेश सबूतों और गवाहों को पर्याप्त नहीं मानते हुए यह फैसला सुनाया, अभय सिंह और अन्य आरोपियों पर लगे सभी आरोपों से उन्हें मुक्त कर दिया.

पीड़ित पक्ष जाएगा हाईकोर्ट

कोर्ट द्वारा आरोपियों को बरी करने पर पीड़ित पक्ष ने सवाल उठाए हैं. पक्ष के वकील ने कहा कि फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे. जबकि अभय सिंह ने इसे न्याय की जीत बताया. बोले हम निर्दोष थे शुरू से ही 19 साल बाद कोर्ट से हमें न्याय दिया.

फ़िलहाल यह मामला अब कोर्ट के बाहर सियासी हलकों में तूल पकड़ गया है. अभय सिंह वही विधायक हैं, जिन्होंने राज्यसभा चुनावों में सपा से बगावत कर बीजेपी प्रत्याशी के पक्ष में मतदान किया था. अभी भले ही किसी का बयान न आया हो, लेकिन अन्दर खाने चर्चाएं तेज हो चुकी हैं.