लखनऊ में एसबीआई बैंक के फील्ड ऑफिसर ने बैंककर्मी पत्नी दिव्या मिश्रा और अपनी बहन की गोली मारकर हत्या कर दी. बाद में आरोपी ने खुद को भी गोली से उड़ा लिया. इस बीच मृतक दिव्या मिश्रा की बहन प्रज्ञा मिश्रा का दर्द छलका है.
फेसबुक पोस्ट में दिव्या मिश्रा की बहन प्रज्ञा मिश्रा ने बताया, "आज दिव्या का पोस्टमॉर्टम नहीं हो पाया सुबह 9-10 बजे का वक्त दिया गया है. मम्मी को अब भी बताने की हिम्मत नहीं जुटा पाई. दिव्या की हालत क्रिटिकल है ये झूठ बताकर बगल में सुला दिया है. पहली बार लग रहा है कि सच कहना कितना मुश्किल होता है. वो पोस्टमॉर्मट हाउस के फ्रीजर में है. ये सच मैं नहीं कह पाई."
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'हां मुझे पता था कि हत्यारा....'
प्रज्ञा ने कहा, "हत्यारे ने मेरा नाम स्टेटस में लिखा है कि मुझे सब पता था. हां मुझे पता था कि हत्यारा मेरी बहन के साथ क्रूरता करता था, इसलिए वो उससे अलग होना चाहती थी. ब्लिंकिट से मंगाए गए टमाटर में अगर कोई टमाटर खराब निकल जाता था तो वो उसे ये कहकर पीटता था कि तूने कैसे ब्लिंकिट किया कि टमाटर खराब निकला."
प्रज्ञा ने बताया कि बकौल मेरी बहन हत्यारे और उसकी बहन ने मिलकर अपनी मां को इतना पीटा था, उसकी अपनी बीमार मां का निधन हो गया था. दिव्या सिर्फ हत्यारे से अलग होना चाहती थी. मेरी बहन ने मुझे बताया था कि फैमिली कोर्ट में काउंसलर के साथ भी हत्यारे की झड़प हुई थी. मेरी बहन ने बताया था कि शादी की सुहागरात पर हत्यारे ने घर के खर्चों की एक लिस्ट बनाई थी और आधा खर्च उठाने की शर्त रखी थी. जिसे मेरी बहन ने सहर्ष स्वीकार किया था.
दिव्या की बहन ने बताया कि दिव्या ने पिछले एक साल से अपने हिस्से का खर्च उठाना बंद कर दिया था. साइको हत्यारे की नजर में ये चीटिंग हो सकती है. मेरी बहन ने मुझे बताया कि उसका पति साइको था, लेकिन इतना बड़ा इसका अंदाजा नहीं था. मुझे वो चीजें पता थीं जो मेरी बहन ने मुझे बताईं थी. इतना सब होने के बाद भी वो तीज का व्रत रखने वाली थी. हाथ में हत्यारे मानस का टैटू नहीं हटवाया था. भीतर ही भीतर वो चाहती थी सब ठीक हो जाए और साइको सुधर जाए.
दिव्या मिश्रा की बहन ने खड़े किए गंभीर सवाल
दिव्या की बहन प्रज्ञा ने सवाल खड़े करते हुए कहा कि बैंक के सामने हत्या के समय का एक सीसीटीवी मिला है इसमें बैंक कर्मचारियों की भीड़ भाग रही है और हत्यारा हत्या कर रहा है. बैंक में काम करने वाले हत्यारे के पास तीन-तीन रिवॉल्वर कहां से आए. किसने उस तक ये रिवॉल्वर पहुंचाईं. किसने उसे इतना जघन्य अपराध करने के लिए प्रेरित किया?
प्रज्ञा मिश्रा ने कहा, "हत्यारा कार नहीं चला पाता था तो कार से आने जाने वाली थ्योरी कहां से आई. वो ऑटो से हत्या करने आया था. ऑटो से ही भागा तो कोई दूसरा इन्वॉल्व जरूर है. ऑटो वाला कौन था. कोई तो होगा जिसे सबके मर जाने के बाद फायदा हो रहा होगा. पुलिस को खोजना चाहिए.
हत्याकांड में राजनीति पर क्या बोली प्रज्ञा?
प्रज्ञा मिश्रा ने आगे कहा, "मीडिया इंटस्ट्री में 2017 के पहले पत्रकारिता करने वाले पत्रकारों में मैं सबसे छोटी हूं. अभी बैठी हूं तो देख रही हूं कि कुछ हमपेशा मेरी बहन की हत्या में राजनीति खोज रहे हैं. 9 वर्षों में मैंने ऐसी पत्रकारिता की है कि जिसकी आलोचना भी करती हूं उसके सामने खड़े होकर आंख में आंख डालकर बात कर सकती हूं."
उन्होंने आगे लिखा, "नजरें नीची करने वाली पत्रकारिता मैंने कभी नहीं की, इसलिए मतभेद रखिए. मतों का अलग-अलग होना जरूरी है, लेकिन मनभेद मत रखिए. आप मुझसे स्नेह करते हों या घृणा प्रज्ञा मिश्रा ने अपने होशो हवास में कोई अनैतिक कृत्य ना कभी किया है ना करेगी. हत्यारे ने पहले भी दिव्या का पीछा किया था."
प्रज्ञा ने यह भी बताया कि दिव्या का स्ट्रेस की वजह से कुछ दिन पहले एक्सीडेंट हुआ था. उसका हाथ और पैर टूट गया था. डेढ़ दो महीने बाद उसने ऑफिस जाना शुरू किया था. वो अब भी लंगड़ाकर ही चलती थी. आज जब घर से निकली थी तो लंगड़ा रही थी.
उसने आगे बताया कि दिव्या ने कितनी प्रताड़ना झेली है उसे जानने वाला हर कोई जानता है. आंखों में आंसू हैं. वक्त ये बस बातें करने का नहीं है, लेकिन आप सबको बताना जरूरी है. तीन सीसीटीवी फुटेज हैं. एक में दिव्या घर से जा रही है..दूसरी में लंगड़ाते हुए हत्यारे से लड़ रही है.
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