राजधानी लखनऊ के अलीगंज में कोचिंग सेंटर में हुए अग्निकांड मामले में लखनऊ विकास प्राधिकरण की विहित प्राधिकारी कोर्ट में तीसरे दिन गुरुवार को सुनवाई पूरी हो गई है. कोर्ट ने इस इमारत के मालिक और एलडीए के इंजीनियर दोनों का पक्ष सुनने के बाद अपने आदेश को सुरक्षित रख लिया है. इस पर आज शुक्रवार को कोर्ट का फैसला आ सकता है.
अलीगंज अग्निकांड मामले में बिल्डिंग मालिक की ओर से अवैध निर्माण अपने खर्च पर हटाने और नई भवन निर्माण नीति के तहत शमन मानचित्र (कंपाउंडिंग) की मांग की गई. वहीं एलडीए के जेई ने कोर्ट को बताया कि बेसमेंट और दो मंजिल का नक्शा स्वीकृत था, जबकि तीसरी मंजिल पूरी तरह अवैध है और स्वीकृत सीमा से कहीं अधिक बेसमेंट बनाया गया है.
कोर्ट में दोनों पक्षों ने पेश की अपनी दलीलें
एलडीए की विहित प्राधिकारी कोर्ट में तीन दिन चली सुनवाई में कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनी, जिसके बाद विहित प्राधिकारी अतुल कुमार ने आदेश को सुरक्षित रख लिया है. जिस पर आज फैसला आने की संभावना है. इस आदेश के बाद तय होगा कि जिस कोचिंग सेंटर की इमारत में आग लगी थी उस पर लखनऊ विकास प्राधिकरण का बुलडोजर चलेगा या शमन मानचित्र की प्रक्रिया अपनाई जाएगी.
बिल्डिंग मालिक के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि वो इस इमारत में अवैध निर्माण को अपने ही खर्चे पर ध्वस्त कर लेंगे. इसके साथ ही उन्होंने नई भवन निर्माण नीति के तहत शमन मानचित्र पास कराने की माँग भी की है. वकील ने कोर्ट को बताया कि इस बिल्डिंग का आवासीय नक्शा पास कराया गया था. हालांकि कोर्ट के मांगने पर वो उस नक्शे को नहीं दे सके. वकील ने कहा कि नक्शा उसी आग में जल गया है.
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वकील ने एलडीए द्वारा जारी नोटिस पर भी सवाल उठाए और कहा नोटिस में ये नहीं बताया गया है कि कितना हिस्सा अवैध है जिसे हटाने के बाद वो नियमों के तहत हो सकता है. वहीं एलडीए के वकील ने कहा कि इस इमारत का बेसमेंट समेत दो मंजिल का नक्शा पास था लेकिन तीसरी मंजिल पूरी तरह अवैध है. सेल बैक का हिस्सा भी नहीं छोड़ा गया था.
बता दें कि बीते महीने 22 जून को अलीगंज स्थित कोचिंग की इमारत में आग लग गई थी. इस हादसे में 15 लोगों की जान चली गई, जिसके बाद इस इमारत में अवैध तरीके से निर्माण और नियमों की अनदेखी की जानकारी सामने आई थी.
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